वैसे तो दिल्ली में देशभर के छात्र पढ़ाई, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आते हैं, लेकिन नार्थ दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां साल भर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे छात्रों का मेला लगा रहता है। प्रतियोगी परीक्षाओं का जुनून इस कदर छाया रहता है कि लॉकडाउन में भी इस इलाके के छोड़ने को तैयार नहीं हुए। इनमें मुख्य है मुखर्जी नगर का इलाका। हालांकि मकान किराया, बिजली बिल, पानी बिल, महंगे टिफिन को लेकर छात्र बेहद ही परेशान रहते हैं।
मुखर्जी नगर इलाका एक तरह से आईएएस तैयारी करने वाले छात्रों का हब बना हुआ है। यहां हर साल दस हजार से अधिक छात्र पहुंच जाते है। यूपीएससी की तैयारी कराने वाले कोचिंग इंस्टीट्यूट की भी इस इलाके में भरमार है। बैंकिंग व अन्य स्नातकोत्तर के बाद की प्रतियोगी परीक्षाओं का भी खूब क्रेज है। देखा जाए मुखर्जी नगर व आसपास के क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष करीब 1 लाख छात्र तैयारियों के लिए पहुंचते है। मुखर्जी नगर इलाका अपने आप में मिनी भारत है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र, जिन्हें हॉस्टल नहीं मिलता है वह इस इलाके में रहते हैं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, उड़ीसा, पूर्वोत्तर राज्यों से भी छात्र पहुंचते है।
हिंदी में यूपीएससी की तैयारी करने वाले सबसे अधिक छात्र
पिछले कुछ सालों से मुखर्जी नगर इलाका हिंदी भाषी छात्रों का केंद्र बन गया है। अंग्रेजी माध्यम में तैयारी करने वाले छात्र तो राजेंद्र नगर स्थित कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ते हैं और करोल बाग, राजेंद्र प्लेस, देव नगर समेत अन्य जगहों पर रहना पसंद करते है, लेकिन हिंदी माध्यम के सभी कोचिंग सेंटर मुखर्जी नगर, नेहरू विहार में होने की वजह से छात्र इन्हीं इलाकों में रहना पसंद करते हैं।
छात्रों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था
मुखर्जी नगर के अलावा आसपास के आउट लेन, विजय नगर, इंदिरा विहार, परमानंद, नेहरू विहार, वजीरपुर गांव, गांधी विहार, संत नगर, निरंकारी, बुराड़ी में अधिक संख्या में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं। इनके लिए किराए के मकान के अलावा पीजी की भी व्यवस्था है। कई संस्थान और इंस्टीट्यूट छात्रों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
किराये के घरों में समूह में रहते हैं छात्र
छात्र किराये पर घर लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। एक फ्लोर लेकर चार-पांच के ग्रुप में रहते हैं और किराया आपस में बांट लेते है। 10 हजार से लेकर 25 हजार तक के फ्लैट किराये पर मिलते हैं। उधर, कई लोगों ने घरों को पीजी में बदल दिया है, जहां बेड के हिसाब से रहने की सुविधा दी जाती है। एक बेड पांच हजार से लेकर दस हजार रुपये तक में मिलता है।
बदइंतजामी से परेशान रहते है छात्र
छात्रों को छोटे-छोटे कमरों का किराया भी ज्यादा देना होता है। बिजली शुल्क प्रति यूनिट दस रुपये तक वसूला जाता है और पानी के लिए भी दो-तीन सौ रुपये लिए जाते हैं। यूपीएससी की तैयारी करने वाली छात्रा लवली कुमारी का कहना है कि छोटे कमरे के लिए भी कम से कम 10 हजार रुपये देने पड़ते हैं। दो लोग साथ नहीं रहे तो किराया देना तक मुश्किल है। हाफ टिफिन जिसमें चार छोटी रोटी के अलावा सब्जी-दाल होती है उसके लिए ढाई हजार खर्च करने पड़ते हैं।
फुल टिफिन 3200-3500 रुपये का आता है। मुखर्जी नगर में रहने वाले छात्र प्रीतम का कहना है कि खर्च इतना अधिक है कि निम्न मध्यम वर्ग परिवार के बच्चे परेशान रहते हैं। किराएदार ऊंची कीमत वसूलते हैं साथ ही बिजली और पानी का भी बिल अलग से लेते हैं। कई घर तो ऐसे हैं जहां यह पता ही नहीं होता कि कब सवेरा हुआ और कब शाम। वेंटिलेशन की व्यवस्था कमरों में नहीं होती।