इस मसले पर छिड़े सियासी विवाद में बौद्ध धर्म के अनुयायी भी कूद पड़े हैं। उनका कहना है कि बौद्ध धर्म अपनाने के लिए इस तरह की प्रतिज्ञा अनिवार्य नहीं है। विशुद्ध तौर पर लोगों को हिंसा, चोरी, व्याभिचार, झूठ और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई जाती है।
धर्मांतरण कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-देवताओं को न मानने वाली शपथ से पद गंवाने वाले दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इस वक्त विवादों में हैं। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने पूछताछ के लिए उनको थाने में बुलाया था। इस मसले पर छिड़े सियासी विवाद में बौद्ध धर्म के अनुयायी भी कूद पड़े हैं।
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उनका कहना है कि बौद्ध धर्म अपनाने के लिए इस तरह की प्रतिज्ञा अनिवार्य नहीं है। विशुद्ध तौर पर लोगों को हिंसा, चोरी, व्याभिचार, झूठ और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई जाती है। जबकि कार्यक्रम आयोजकों का कहना है कि विवाद बेवजह हो रहा है। दूसरे धर्म को अपनाने के लिए तो पहले धर्म की सभी चीजों का त्याग करना पड़ता है। बौद्ध धर्म अपनाने के दौरान भीमराव आंबेडकर की ओर से ली गई यह प्रतिज्ञाएं उसी का हिस्सा हैं।
महाबोधी सोसाइटी के सीलावंसा थेरो का कहना है कि बौद्ध धर्म अपनाने के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है। व्यक्ति को अपना आचरण सुधारना होता है। इसके लिए गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वालों को पांच शपथ (पंचशील) ही लेनी होती हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को राजनीति से प्रेरित बताया। भारतीय बौद्ध संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंते संग प्रिय राहुल का कहना है कि यह पूरा कार्यक्रम हिंदू और बौद्ध धर्म के खिलाफ है। जहां इसमें हिंदू धर्म का अपमान है, वहीं बौद्ध धर्म को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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धर्मांतरण कार्यक्रम का आयोजन करने वाली मिशन जय भीम संस्था के राष्ट्रीय सचिव ईश्वर सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले को बेवजह विवादित बनाया जा रहा है, जबकि इसमें ऐसा कुछ है ही नहीं। किसी भी नए धर्म में शामिल होने के लिए पिछले धर्म से संबंधित हर रीति रिवाज और चीजों को छोड़ने की शपथ दिलाई जाती है। बौद्ध धर्म को अपनाने के लिए पंचशील जरूरी है, लेकिन जब तक हम पुरानी चीजों को नहीं छोड़ेंगे तो नई को कैसे अपनाएंगे। कार्यक्रम में दिलाई गई प्रतिज्ञा के पीछे भी यही कारण था। इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
अब तक एक लाख लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म
मिशन जय भीम के ईश्वर सिंह बताते हैं कि उनकी संस्था को बने हुए दो साल का समय हुआ है। पांच अक्तूबर को हुआ कार्यक्रम अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम था। अब तक हुए सभी कार्यक्रमों में करीब एक लाख लोग बौद्ध धर्म अपना चुके हैं।