मेट्रो स्टेशन, पार्किंग और डिपो, अब हर जगह परंपरागत चमकीले बल्ब की जगह एलईडी की रोशनी दिखेगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इस दिशा में पहल करते हुए ऊर्जा की खपत में कमी और बचत के लिए फेज-1, 2 के 155 स्थानों पर एलईडी लाइट्स लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया है।
अब तक एक लाख से अधिक बल्ब लगाए जा चुके हैं, जबकि अक्तूबर तक शेष 25 फीसदी कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। खास बात यह है कि परंपरागत लाइट की अपेक्षा एलईडी 40 फीसदी अधिक रोशनी देंगी। डीएमआरसी ने विशेष अभियान के तहत पिछले महीनों के दौरान पार्किंग, स्टेशनों और डिपो में परंपरागत सीएफएल, फ्लोरेसेंट लाइट के बजाय एलईडी लाइटें लगाने की शुरुआत कर दी।
इसके तहत दिल्ली मेट्रो के 155 स्थानों को एलईडी से चकाचौंध किया जा रहा है। डीएमआरसी ने इस अभियान के तहत करीब 75 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 25 फीसदी 35000 लाइटें अक्तूबर तक लगाई जाएंगी। पारंपरिक लाइटों की 10 वर्षों की मियाद होने के बाद डीएमआरसी ने एलईडी लगाने की शुरुआत कर दी। इन लाइटों के इस्तेमाल से करीब 50 फीसदी ऊर्जा की बचत होगी। इन एलईडी लाइटों के रख रखाव पर भी काफी कम खर्च होगा।
50 हजार घंटे मिलेगी एलईडी से रोशनी
डीएमआरसी कर्मियों को एलईडी लाइट लगाने के लिए कम वक्त मिल सका, क्योंकि रात के वक्त परिचालन बंद होने के बाद से सेवाएं शुरू होने से पहले रोजाना दो घंटे तक काम किया। मेंटीनेंस टीम ने लगातार मेहनत करके एक लाख एलईडी बल्व लगाने का काम पूरा किया ताकि लोगों को राहत मिल सके। फेज-1, 2 में इस बदलाव के साथ फेज-3 के स्टेशनों में ऐसी लाइटें लगाई गई हैं। फेज-4 परियोजना में भी एलईडी का इस्तेमाल किया जाएगा। एक एलईडी औसतन 50 हजार हजार घंटे तक ऑन रहते हुए अधिक रोशनी दे सकती हैं, जबकि परंपरागत बल्ब की तुलना में 40 गुना अधिक प्रकाशवान हैं।