दिल्लीवासियों को सिग्नेचर ब्रिज की 154 मीटर ऊंचाई से शहर का विहंगम दृश्य देखने के लिए लंबा इंतजार करना होगा। पर्यटन विभाग को लिफ्टों के संचालन की अनुमति नहीं मिली। अधिकारियों ने पर्यटकों को ऊपर की ओर गैलरी तक ले जाने के लिए लिफ्टों के संचालन की अनुमति नहीं दी।
दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) के अधिकारियों ने कहा कि पुल के तोरण के पैरों में चार लिफ्ट लगाई गई हैं। दो लिफ्ट 60 डिग्री के कोण पर और दो 80 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं।
बता दें कि दिल्ली मेट्रो फेज-4 में मौजपुर-मजलिस पार्क के बीच 12.55 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके तैयार होने से लाखों यात्रियों को वाहनों के जाम से छुटकारा मिलने साथ ही काफी कम समय में गंतव्य तक पहुंचने का मौका मिल सकेगा। इस कॉरिडोर पर सफर के दौरान यात्रियों को सिग्नेचर ब्रिज और यमुना नदी के सौंदर्य को भी निहारने का मौका मिलेगा।
यमुना नदी पर यह दिल्ली मेट्रो के पांचवे पुल का निर्माण किया जा रहा है। पहली बार कैंटिलीवर विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है। खास बात यह है कि कोरोना काल में मेट्रो के इस कॉरिडोर के डिजाइन को मेट्रो इंजीनियरों ने तैयार किया है।
पिंक लाइन के विस्तार के बाद 2023 तक देश का पहला रिंग मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। फिलहाल भजनपुरा चौक और झड़ौदा माजरा के बीच पिलर लगाने के साथ साथ यमुना क्षेत्र में भी काम तेजी से चल रहा है। मानसून के दौरान यमुना के बढ़ते जल स्तर से निर्माण में दिक्कत न आए इसके लिए भी मेट्रो ने पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी।