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लंदन से लौटे परिवार ने क्वारंटीन करने को हाईकोर्ट में दी चुनौती

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नई दिल्ली। कोरोना जांच में निगेटिव आने के बावजूद लंदन से लौटे चार सदस्यीय परिवार को सात दिनों की संस्थागत क्वारंटीन में भेजे जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय, उड्डयन मंत्रालय व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में परिवार ने उन लोगों को जबरन क्वारंटीन में भेजे जाने को गैरकानूनी हिरासत बताते हुए मुआवजे की मांग की है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गणेश चंद शर्मा ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल, परिवार व दो बच्चों सहित जब लंदन से चले तो वहां उनकी जांच में कोरोना निगेटिव पाया गया और उन्हें हवाई यात्रा करने की अनुमति दी गई। जब 20 फरवरी को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली पहुंचे तो वहां भी उन लोगों की कोरोना जांच की गई व पूरा परिवार निगेटिव पाया गया।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद पूरे परिवार को सात दिनों के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में द्वारका स्थित एक पांच सितारा होटल भेज दिया गया। जहां का खर्च भी उन लोगों को ही वहन करना पड़ा। उनसे प्रति व्यक्ति 26 सौ रुपये लिए गए जबकि यह खर्च सरकार को वहन करना चाहिए था।
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उन्होंने कहा कि यह सरासर तय नियमों के खिलाफ है। कोरोना दिशा निर्देश के तहत रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने पर ही क्वारंटीन करने का प्रावधान है। ऐसे में जबरन होटल में रखना गैरकानूनी हिरासत का मामला है।
अदालत से आग्रह किया कि सरकार को उनके मुवक्किलों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया जाए और यदि क्वारंटीन करने की जरूरत भी है तो उनके घर पर ही किया जा सकता है।
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