कुमार विश्वास ने अपने तीन साल पुराने ट्वीट को रिट्वीट किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि हर साल और ज्यादा भयावहता के साथ सामने आ जाता है, 999 एक्यूआई? हर बात पर राजनीति, हर बात पर धर्म-जाति-वोट, एक दूसरे पर दोष। कौन राह निकालेगा?
दिवाली के बाद या उसके आसपास हर साल दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा बेहद खराब हो जाती है। लोगों की सांस और आंखों में खुजली की परेशानी बढ़ जाती है। दिवाली के मौके पर लोग पाबंदी के बावजूद भी जमकर पटाखे फोड़ते हैं। पराली के जलने से भी प्रदूषण में काफी इजाफा होता है।
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एनसीआर की हवा इतनी खराब हो जाती है कि सांस लेना भी दूभर हो जाता है। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दिल्ली की हवा सिगरेट के धुएं से ज्यादा हानिकारक हो गई है। साथ ही कहा कि प्रदूषण से कोरोना के मामले में भी बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदूषण के चलते लोगों का जीवनकाल भी काफी कम हो गया है।
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सारे रहनुमा वोट की चिंता में लगे हैं, राह कौन निकालेगा
इस बीच विश्व विख्यात कवि डॉक्टर कुमार विश्वास ने अपने तीन साल पुराने ट्वीट को रिट्वीट किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि हर साल और ज्यादा भयावहता के साथ सामने आ जाता है, 999 एक्यूआई? हर बात पर राजनीति, हर बात पर धर्म-जाति-वोट, एक दूसरे पर दोष। कौन राह निकालेगा? सारे रहनुमा तो अपनी-अपनी वोट की चिंता में लगे हैं। हमारी हवा छीनकर अपनी हवा बनाने में लगे हैं छोटे-बड़े सरकार।
सीने में जलन आंखों में तूफ़ान सा क्यूं हैं?
तीन साल पहले भी दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर प्रदूषण के चलते गंभीर स्थिति थी। उस समय उन्होंने ट्वीट किया था कि सीने में जलन आंखों में तूफ़ान सा क्यूं हैं? गला बेहद खराब हो गया है, एनसीआर में फैले प्रदूषण के कारण आंख-नाक से पानी बह रहा है, खांसी ने कब्जा शुरू कर दिया है! पता नहीं 'हम-आप-व्यवस्था' कौन ज़िम्मेदार है पर ‘हवा’ जैसी जरूरी चीज भी इस लोकतंत्र में न मिले तो कहां जाएं? उन्होंने इसी ट्वीट को रिट्वीट कर लिखा है कि हमारी हवा छीनकर अपनी हवा बनाने में लगे हैं छोटे-बड़े सरकार।
पराली जलाने के मामले में वृद्धि
सफर के मुताबिक, शनिवार को बीते 24 घंटे में पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की पांच हजार से अधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं। इस सीजन की यह सबसे अधिक पराली जलाने की घटना है। दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली हवाओं का रूख भी उत्तर पश्चिम बना हुआ है। इससे दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सा 41 फीसदी हो गया। शुक्रवार को यह आंकड़ा 36 फीसदी था। राहत की बात यह है कि हवा की रफ्तार तेज होने के कारण प्रदूषण फैल गया है। इससे शनिवार को दिल्ली समेत अन्य शहरों के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक में मामूली कमी दर्ज हुई है।