मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग पूछ रहे है कि जब इस देश में पिजा, बर्गर, स्मार्ट फोन, बर्गर, कपड़े तक कि होम डिलीवरी हो सकती है तो गरीबों के घर में राशन क्यों नहीं। पूरा देश जानना चाहता है कि योजना को क्यों खारिज किया गया।
कहा जा रहा है कि कोर्ट में केस है इसलिए स्कीम खारिज कर दी। राशन दुकानदार सरकार के खिलाफ स्टे लेने गए थे। हाईकोर्ट ने भी इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने स्टे नहीं लगाया तो केंद्र ने स्टे लगा दिया। लोग पूछ रहे है कि राशन डीलरों से हमदर्दी क्यों है सरकार को। अगर प्रधानमंत्री ही राशन माफिया के साथ खड़े होंगे तो गरीबों के साथ कौन खड़ा होगा। 20 लाख गरीबों को कौन सुनेगा।
कोरोना के तीसरी लहर का दिया हवाला
मुख्यमंत्री न कोरोना के तीसरी लहर का भी हवाला दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों पर भारी पड़ेगा। ऐसे में अगर बच्चों के माता-पिता राशन की दुकान पर लाइन में लगते है तो उन्हें भी कोराना हो सकता है। राशन की दुकाने सुपर स्प्रेडर है। कितनी ऐसी गर्भवती, बुजुर्ग है जो राशन की दुकान पर नहीं जाना चाहते। इस योजना को तो पूरे देश में लागू कर देना चाहिए। राशन देने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
यह वक्त झगड़ने का नहीं है
बातों बातों में मुख्यमंत्री ने देश की अंदूरुनी लड़ाई का ठिकरा भी प्रधानमंत्री पर फोड़ा। कहा कि लोगों को लगने लगा है कि केंद्र सरकार सब से झगड़ रही है। ममता दीदी से, झारखंड सरकार से, महाराष्ट्र से, लक्षद्वीप से और अब दिल्ली राशन योजना को लेकर दिल्ली से। इस बात से लोग दुखी है, ऐसे देश कैसे चलेगी। मुख्यमंत्री ने पूछा कि आप हमसे क्यो लड़ रहे है। हम सब भारतवासी है। ऐसे में आपस में लड़ेंगे तो कोरोना से कैसे लड़ पाएंगे। हम सब आपस में लड़ेंगे तो देश कैसे चलेगा। कल सब लोग अखबारों के हेडलाइन में यह पढना चाहते है कि मोदी जी ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर गरीब लोगों के घर-घर तक राशन पहुंचाया। यह नही सुनना चाहते कि केंद्र सरकार ने फिर से एक अच्छी योजना को रोक लिया। योजना राष्ट्र हित में है। इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।
पिछली सभी सरकारों को लिया आड़े हाथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक की सरकारों ने देश की गरीब लोगों को 75 साल तक लाइनों में खड़ा किया। 75 साल में कोई सरकार इन माफियाओं को खत्म करने की हिम्मत नहीं की। राशन माफियाओं का दबदबा रहा है। 17 साल पहले इस माफिया को ललकारने की हिम्मत की थी। तबदिल्ली की झुग्गियों में एक एनजीओ में काम किया करता था। हिम्मत की नतीजन सात बार खतरनाक हमले हुए। एक बहन की गर्दन तक कट गई। हालांकि उनकी जान नहीं गई। गरीबों को अगले 75 साल लाइनों में मत खड़ा कीजिए। नहीं तो ये लोग किसी को माफ नहीं करेंगे। फाइलों में जनता कब तक राशन लेती रहेगी। मकसद श्रेय लेना नहीं है।