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कश्मीर मामला : मोहम्मद मनन डार की याचिका पर एनआईए को नोटिस

Sat, 26 Feb 2022 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

 24 वर्षीय कश्मीरी फोटो जर्नालिस्ट मोहम्मद मनन डार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत मामला दर्ज है। वहीं अदालत ने दो अन्य आरोपियों मनन डार के भाई हनान गुलजार डार और जमीं आदिल भट द्वारा दायर याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मोहम्मद मनन डार की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी एनआईए से जवाब मांगा है।  24 वर्षीय कश्मीरी फोटो जर्नालिस्ट मोहम्मद मनन डार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत मामला दर्ज है। वहीं अदालत ने दो अन्य आरोपियों मनन डार के भाई हनान गुलजार डार और जमीं आदिल भट द्वारा दायर याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है।

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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को इस मामले में आठ अप्रैल तक जवाब दाख्किल करने का निर्देश दिया है।मामला पिछले साल अक्टूबर में यूएपीए की धारा 18, 18ए, 18बी, 20, 38 और धारा 39 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी, 121ए, 122 और 123 धारा के तहत दर्ज एफआईआर से संबंधित है।

गृह मंत्रालय के आदेश के तहत प्राप्त सूचना पर एफआईआर दर्ज की गई।आरोप है कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेएम), हिजाब के कैडर -उल-मुजाहिदीन (एचएम), अल बद्र और इसी तरह के अन्य संगठन और उनके सहयोगी जम्मू और कश्मीर में सक्रिय है और पाकिस्तान से साजिश रच रहे हैं। इससे जम्मू-कश्मीर और राष्ट्रीय राजधानी सहित भारत के प्रमुख शहरो में हिंसक आतंकवादी कृत्य करने की योजना बनाई गई।
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आरोप लगाया गया कि आतंकवादी संगठनों और उनके सहयोगियों ने आतंकवादी कृत्यों को करने की साजिश रची। उन्होंने स्थानीय युवाओं को आतंकवादी संगठनों के सदस्य बनने के लिए भर्ती किया और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए हथियार और गोला-बारूद की खरीद की और इसके अलावा सदस्यों ने सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की भी साजिश रची।याचिका में आरोप लगाया गया कि मनन डार को पिछले साल 10 अक्टूबर को बिना किसी औपचारिक सूचना के स्थानीय पुलिस स्टेशन द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया और लगभग दो सप्ताह तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसके बाद उसे 22 अक्टूबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

याचिका में पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष एनआईए न्यायाधीश द्वारा 17 जनवरी को पारित आदेश को चुनौती दी गई जिसमें यूएपीए की धारा 43 डी (2) के तहत जांच पूरी करने के लिए 90 दिनों की अवधि बढ़ा दी गई थी।वहीं याची ने तर्क रखा कि जांच एजेंसी द्वारा 90 दिन में आरोपपत्र दायर न करने पर वह डिफ़ॉल्ट जमानत पर रिहा होने का हकदार है। सुनवाई के दौरान मनन डार की ओर से पेश अधिवक्ता तारा नरूला ने कहा कि एफआईआर में एक कथित साजिश के अस्पष्ट और सामान्य दावे हैं और किसी भी आरोपी व्यक्ति का कोई विवरण नहीं दिया।

दूसरी ओर एनआईए की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक गौतम नारायण ने कहा कि आरोपी व्यक्तियों के मोबाइल उपकरणों से बरामद आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न आपत्तिजनक सामग्री कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने में शामिल सीमा पार संगठनों के साथ उनके संबंधों का खुलासा करती है। 

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