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Plastic Ban : आसान नहीं होगा ‘प्लास्टिक के पहाड़’ से निजात पाना, दिल्ली में रोज निकलता है 690 टन कचरा

Thu, 30 Jun 2022 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली

सार

इसे लेकर दिल्ली सरकार की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, दिल्ली में प्रतिदिन निकलने वाले 690 टन प्लास्टिक कचरे के पहाड़ को खत्म करना आसान नहीं है। क्योंकि, दिल्ली में बड़े स्तर पर इसका उत्पादन होने के साथ इसकी खपत भी होती है। 
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प्लास्टिक कचरा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजधानी में आगामी एक जुलाई से एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने जा रहा है। इसे लेकर दिल्ली सरकार की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, दिल्ली में प्रतिदिन निकलने वाले 690 टन प्लास्टिक कचरे के पहाड़ को खत्म करना आसान नहीं है। क्योंकि, दिल्ली में बड़े स्तर पर इसका उत्पादन होने के साथ इसकी खपत भी होती है। 

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सेंटर फॉर साइंस एंवायरोमेंट(सीएसई) की स्टेट्स ऑफ इंडिया इंवायरोमेंट 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रतिदिन 689.8 टन प्लास्टिक कचरे का उत्पादन होता है, जो कि मेट्रोपॉलिटन शहरों में पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर कोलकाता 429.5 व चेन्नई तीसरे स्थान पर 429.5 टन प्लास्टिक कचरे के साथ तीसरे स्थान पर है। 

इस संबंध में पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में बड़े स्तर पर प्लास्टिक कचरा निकलने की वजह यहां की आबादी है। बीते 50 सालों में यहां की आबादी में 200 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। वहीं, मुंबई और बेंगलूरु जैसे शहरों की तुलना में यहां कूड़े के पृथककरण को लेकर भी लोगों में अधिक जागरूकता नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 के आंकड़े बताते है कि देश में 18.5 मिलियन टन प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें से करीब 60 फीसदी हिस्सा एकल उपयोग प्लास्टिक का था।
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यह हो सकती है आगे की राह
पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को रोकने की कड़ी में लोगों को पारंपरिक दौर में लौटना पड़ेगा। इसके तहत मिट्टी से बने बर्तन, पत्ते से बनी थाली व खाद सामग्री से बने बर्तनों व अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके माध्यम से दिल्ली में चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक के कचरे को खत्म किया जा सकता है।

इस तरह का होता है प्लास्टिक
आमतौर पर प्लास्टिक थर्माप्लास्टिक होता है। इसमें से विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पदार्थ बनते हैं। पॉलीस्टाइरिन व लॉ डेंसिटी पॉलीइथाइलिन (एलडीपीई) का आमतौर पर  पुनर्चक्रण हो जाता है। इससे पॉली बैग, डिब्बे व बोतलों का निर्माण किया जाता है। वहीं, पॉलीप्रॉपलीन से कप, स्ट्रा, ऑटो पार्टस का निर्माण होता है। पॉलीस्टाइरिन से डिस्पोजेबल कप, प्लेट, चम्मच, ट्रे, सीडी कवर व कैसेट बक्से का निर्माण किया जाता है। हाई डेंसिटी पॉली इथाइलिन(एचडीपीई) से मिल्क पाउच, कैरी बैग, कूड़ेदान और बेस कप का निर्माण होता है। 
यहां होता है प्लास्टिक का उत्पादन : नारायणा, ओखला, मायापुरी, पहाड़गंज, झिलमिल व विश्वास नगर।

प्लास्टिक उत्पादन में बढ़ेगी लागत 
केंद्र सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक के तौर पर 19 वस्तुओं को चिन्हित किया है। इनका उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दिल्ली सरकार संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर औद्योगिक इकाइयों व आपूर्तिकर्ताओं की निगरानी भी करेगी। नियमों का उल्लंघन होने पर इससे जुड़े व्यवसाय को बंद कर दिया जाएगा। इस संबंध में दिल्ली लघु उद्योग भारती के दिल्ली प्रदेश संयुक्त सचिव मुकेश अग्रवाल कहते हैं कि सरकार के नए फैसले से एकल उपयोग प्लास्टिक से जुड़े लाखों लोगों के आगे संकट खड़ा हो गया है। सरकार खाद बैग पर जोर दे रही है, लेकिन इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल देश में नहीं मिलता है। 

इन 19 उत्पादों को किया गया है चिन्हित
सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक के तौर पर 19 उत्पादों को चिन्हित किया है। इसके तहत ईयर बड्स, झंडे में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक, गुब्बारों की प्लास्टिक स्टिक, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, थर्माकोल, प्लेट, कप, गिलास, चम्मच, कांटे, चाकू, स्ट्रा, ट्रे, खाद्य सामाग्री की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट व 100 माइक्रोन से कम पीवीसी बैनर और स्टीकर शामिल हैं। 

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढ़ाने के साथ कचरा प्रबंधन भी सीखेंगे विद्यार्थी

दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के बच्चे वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढ़ाने के साथ ही कचरा प्रबंधन भी सीखेंगे। प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये जानकारी दी जाएगी। देश में यह अनोखा कार्यक्रम है, जिसकी पहल एमसीडी ने की है। 

 जापान के स्कूलों में कुछ इसी तरह से बच्चों को अनिवार्य रूप से सफाई व कचरा प्रबंधन सिखाया जाता है। अब एमसीडी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपने 25 स्कूलों में इसकी शुरुआत की है। बाद में इसे सभी विद्यालयों में लागू किया जाएगा।

 इस कार्यक्रम के लिए एमसीडी ने निजी सहयोगियों से हाथ मिलाया है। एमसीडी को आईटीसी वाऊ और सुल्तान चंद्र प्रकाशन से सहयोग मिला है। प्रोजेक्ट के तहत केशवपुरम क्षेत्र के 25 स्मार्ट विद्यालयों को चुना गया है। बुधवार को केशवपुरम क्षेत्र के विद्यालय में स्थानीय निगम उपायुक्त नवीन अग्रवाल, उप शिक्षा निदेशक सुजाता मालिक, सुल्तान चंद्र प्रकाशन के निदेशक आशीष अग्रवाल और आईटीसी वाऊ के निदेशक उमाकांत की मौजूदगी में इस कार्यक्रम को शुरू किया गया।

जल्द ही इस कार्यक्रम के संचालन के लिए सभी 25 विद्यालयों में कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी, जहां छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संचार होगा। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए ईएसआरईई एनजीओ और सुल्तान चंद प्रकाशन द्वारा संचालित एआई मेथड का उपयोग किया जाएगा। 
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