नई दिल्ली। ईरान में फंसे पांच भारतीय नाविकों को भारतीय मिशन की सहायता प्रदान की गई है और कानून के तहत उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। अदालत ने मामले की सुनवाई 21 दिसंबर तय की है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ईरानी अदालत द्वारा साजिश के मामले में बरी किए जाने के बाद भी वहां फंसे नाविकों के परिवारों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही हैं। उन्होंने ईरान सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाने और उन्हें वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की है।
केंद्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय मिशन ने पांचों नाविकों को बोर्डिंग और लॉजिंग की सुविधा प्रदान की है। उन्हें साप्ताहिक आधार पर कपड़े, आवश्यक प्रसाधन और किराने का सामान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने कहा मिशन ने बड़ी मुश्किल से बोर्डिंग सुविधा का प्रबंधन किया है, क्योंकि कोई भी होटल पहचान के प्रमाण के बिना आवास देने को तैयार नहीं था।
केंद्र ने कहा मिशन अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना। उन्होंने बताया कि उन सभी का स्वास्थ्य अच्छा है। उन सभी को स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी गई है।
केंद्र ने कहा चूंकि उनके पासपोर्ट ईरानी अधिकारियों की हिरासत में हैं। इसलिए मिशन कोई अन्य पहचान दस्तावेज जारी नहीं कर सकता। पासपोर्ट ही एकमात्र पहचान दस्तावेज है जिसे विदेशी सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त है। विदेश मंत्रालय से उनके पासपोर्ट का पता लगाने और उन्हें सौंपने का अनुरोध किया है।
केंद्र ने ईरान के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के संबंध में नाविकों को कानूनी सहायता प्रदान करने के मुद्दे पर कहा कि मामले की न्यायिक कार्यवाही के दौरान स्थानीय अधिकारियों द्वारा उन्हें कानूनी सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा यह ध्यान दिया जा सकता है, क्योंकि उनका मामला नशीले पदार्थों की तस्करी (300 किग्रा मॉर्फिन) के आरोप में विचाराधीन है, जो एक गंभीर अपराध है।
पेश मामले में पांच नाविकों को संयुक्त अरब अमीरात में नौकरी का आश्वासन दिया गया था। हालांकि उन्हें ईरान ले जाया गया जहां वे एक कार्गो पोत में शामिल हो गए थे। पिछले साल फरवरी में ईरानी अधिकारियों द्वारा पोत पर मारे गए एक छापे के दौरान कैप्टन को उपरोक्त नाविकों के साथ गिरफ्तार किया गया था।
इस छापेमारी में उन पर गहरे समुद्र में नशीले पदार्थों की तस्करी की साजिश का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जहाज के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा ट्रायल कोर्ट ने इस साल नौ मार्च को सभी नाविकों को बरी कर दिया था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने 403 दिनों तक सलाखों के पीछे रहने के बावजूद उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज सौंपने से इनकार कर दिया।