तीन साल पहले पुलवामा में 14 फरवरी को आत्मघाती हमले में जिस बस को आतंकियों ने बम विस्फोट से उड़ाया, उसके ड्राइवर जयमाल सिंह का नाम मूल रोस्टर में था ही नहीं। बल्कि वे अपने एक ऐसे साथी की जगह स्वेच्छा से गये थे जिनकी बेटी की शादी होने जा रही थी। इस हमले में जयमाल सिंह सहित 40 सीआरपीएफ के सैनिक शहीद हुए थे। इस हमले से जुड़े कई खुलासे आईपीएस अधिकारी दानेश राणा ने अपनी नई पुस्तक ‘एज फार एज द सेफरन फील्ड्स’ में किया है। राणा इस समय जम्मू और कश्मीर पुलिस में एडिशनल डायरेक्टर जनरल हैं।
पुस्तक में उन्होंने पुलवामा हमले पर संबंधित लोगों के इंटरव्यू, पुलिस चार्जशीट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कई जानकारियां दी हैं। आतंकवाद के आधुनिक चेहरे के साथ बस में सवार लोगों के बारे में भी बताया है। उन्होंने लिखा, यह बस वैसे तो चंबा के किरपाल सिंह को चलानी थी। लेकिन उनकी बेटी की शादी होने जा रही थी और उनकी छुट्टी मंजूर हो चुकी थी। यात्रा के बाद उन्हें जम्मू से लौट कर घर जाने की अनुमति थी, लेकिन यह आशंका भी थी कि मौसम बिगड़ने पर बारिश और बर्फबारी में वे श्रीनगर में फंस सकते हैं। वैसे ही यह काफिला करीब 1 हफ्ते तक मार्ग बंद रहने के बाद श्रीनगर जा रहा था। ऐसे में किरपाल की जगह जयमाल सिंह ने जाने की सहमति दी। 13 फरवरी की रात को परिवार परिवार से आखिरीबार बात की थी। एजेंसी
असामान्य ढंग से बड़ा था काफिला
राणा लिखते हैं कि इस काफिले में जयमाल नीले रंग की बस चला रहे थे। यह काफिला आकार के लिहाज से असामान्य था। इसमें 78 वाहन थे। कुल 15 ट्रक, आईटीबीपी की दो बसें, एक अतिरिक्त बस, एक रिकवरी वैन व एंबुलेंस काफिले में शामिल थे।
क्षतिग्रस्त फोन से मिले सुराग
पुलवामा हमले की जांच एनआईए कर रही थी। लेकिन प्राथमिक स्तर पर इसे सुलझाने में उसे सफलता नहीं मिल रही थी। राणा लिखते हैं कि वह कई फॉरेंसिक व वैज्ञानिक साक्ष्यों को जोड़ती, लेकिन फिर आगे का रास्ता नहीं मिलता। हमलावर कौन थे, यह पता नहीं चल रहा था। जांच रुक चुकी थी। फिर एजेंसी के हाथ एक क्षतिग्रस्त फोन लगा। यह फोन जैश ए मोहम्मद के आतंकियों से हुई मुठभेड़ वाली जगह से मिला था जिसमें दो आतंकियों का सफाया किया गया था। फोन जीपीएस इंटीग्रेटेड था। यानी इससे ली गई तस्वीरों व वीडियो की जियो-टैगिंग हो रखी थी।
आखिरी समय पर बस से उतर गये थे बेलकर
अहमदनगर महाराष्ट्र के रहने वाले सीआरपीएफ के कांस्टेबल ठाका बेलकर आखिरी समय पर उस बस से उतर गये थे, जिस पर हमला हुआ। राणा के अनुसार उनके परिवार ने उनकी शादी तय कर दी थी और तैयारियां चल रही थीं। 10 दिन बाद होने जा रही इस शादी के लिए उन्होंने अवकाश का आवेदन किया हुआ था, लेकिन अनुमति नहीं आई थी, इसलिए वे बस में सवार हो चुके थे। बस रवाना होने से कुछ मिनट पहले उन्हें अवकाश स्वीकृति की सूचना मिली। वे रवानगी के आखिरी समय में बस से उतर गए।