अभी वोट वाले निगम क्षेत्र से चुनाव लड़ने का है प्रावधान। इससे एकीकरण के बाद अस्तित्व में आए नियमों में भी दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग को संशोधन करना पड़ेगा। विलय होने के बाद नए नियम लागू हो जाएंगे।
तीनों नगर निगम का विलय होने पर नेताओं के लिए पूरी दिल्ली में चुनाव लड़ने के अवसर मिलेंगे। इससे एकीकरण के बाद अस्तित्व में आए नियमों में भी दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग को संशोधन करना पड़ेगा। विलय होने के बाद नए नियम लागू हो जाएंगे।
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तीनों नगर निगमों के एक होने के बाद दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव के संबंध में दिल्ली नगर निगम वाले नियम लागू करने पड़ेंगे। उसे एकीकृत नगर निगम के इलाके को एक हिस्सा बनाना होगा। इस तरह नेता पूरी दिल्ली में अपनी श्रेणी अनुसार आरक्षित वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे। आयोग ने 10 साल पहले तीन नगर निगम बनने के बाद दिल्ली को तीन हिस्सों में बांट दिया था है और नगर निगम चुनाव के नियमों में परिवर्तन कर दिया था।
आयोग ने एक-दूसरे नगर निगम में जाकर नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगा रखी है। नेता उसी नगर निगम में चुनाव लड़ सकते हैं जिस नगर निगम में उनका वोट है, मगर वह उस नगर निगम के किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकते हैं। इस तरह आयोग के नियम के बाद से नेताओं के लिए चुनाव लड़ने के सीमित अवसर रह गए थे।
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खास तौर पर बड़े नेताओं और दो नगर निगम की सीमा से सटे वार्डों में रह रहे नेताओं के लिए चुनाव लड़ने का संकट पैदा हो गया था। दरअसल, उनके वार्ड की श्रेणी उनके अनुसार नहीं होने पर वह चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते है, लेकिन तीनों नगर निगमों को विलय होने पर उनकी यह समस्या दूर हो जाएगी।