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Delhi: हाईकोर्ट ने तलब की सोनम की मेडिकल रिपोर्ट, एम्स निदेशक समेत इन लोगों को कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश

Tue, 21 Jul 2026 03:54 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की अपील पर व्यापक सुनवाई की।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की अपील पर व्यापक सुनवाई की। याचिका में सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग ठुकरा दी गई थी। अदालत ने सोमवार को कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही एम्स निदेशक और उपचार में शामिल मुख्य चिकित्सक को मंगलवार को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने वांगचुक की पत्नी की ओर से बहस शुरू की। उन्होंने 16 जुलाई को इसी पीठ की ओर से पारित आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वांगचुक होश में हैं, सजग हैं और स्वयं पत्र लिख रहे हैं। सिब्बल ने बताया कि 17 जुलाई को उनका पोटैशियम स्तर सामान्य था, लेकिन 18 जुलाई को बिना परिवार या वांगचुक से सलाह किए, कोई रिपोर्ट साझा किए, पुलिस बल का प्रयोग कर उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वांगचुक न तो गिरफ्तार हैं और न ही हिरासत में, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज का अधिकार है। 

सिब्बल ने लिखित रूप में रिपोर्ट साझा करने की मांग की थी, लेकिन मना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध डिस्चार्ज (डीएएमए) के लिए आवेदन दिया है, ताकि डॉक्टरों पर दोष न आए। सिब्बल ने संवैधानिक रूप से मान्य भूख हड़ताल को प्रदर्शन का वैध साधन बताते हुए कहा कि बिना कानूनी आधार के किसी की स्वायत्तता नहीं छीनी जा सकती। उन्होंने आत्ममरण से संबंधित न्यायिक पूर्ववृत्त और विभिन्न देशों की अदालतों के आदेशों का भी हवाला दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से दलील देते हुए स्पष्ट किया कि यह आत्ममरण का मामला नहीं, बल्कि आत्महत्या या जानबूझकर स्वास्थ्य बिगाड़ने जैसी स्थिति को रोकने का है। 
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बताया कि रिपोर्ट्स में कोई बड़ा अंतर नहीं है, परिवार को मिलने दिया जा रहा है और बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं। वांगचुक की असुविधा देखते हुए एम्स का एक डॉक्टर स्थायी रूप से तैनात किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मामले को मंगलवार दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित कर दिया। अदालत ने सफदरजंग अस्पताल, एम्स और निजी प्रयोगशाला से वांगचुक के रक्त और मूत्र के नमूनों की सभी रिपोर्टें शपथ-पत्र सहित पेश करने का निर्देश दिया। 

धरने की निगरानी पर भी याचिका पर आज सुनवाई
जेएनयू की पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष आईसी घोष की याचिका पर भी आज बहस हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि बारिश में भीगी हुई महिला प्रदर्शनकारियों के वीडियो बनाए जा रहे थे। सोते हुए प्रदर्शनकारियों के वीडियोग्राफी की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि हम जानवर नहीं है हम स्वतंत्र नागरिक है और अपने प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जवाब में केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह मंगलवार को वांगचुक की याचिका के साथ ही इस याचिका पर भी जवाब देंगे। जिसके बाद याचिका को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।

सोनम ने लिखा-आगे भी भूख हड़ताल रहेगी जारी
सफदरजंग अस्पताल और वीएमसीसी में भर्ती सोनम वांगचुक का इलाज सोमवार को भी जारी रहा। अस्पताल के अनुसार, उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि, उनका शुगर लेवल थोड़ा कम है। सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम वांगचुक पर नजर रखे है। सोनम ने सोमवार को अस्पताल से हाथ से लिखा नोट जारी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे युवाओं के साथ जिस क्रूरता से व्यवहार किया जा रहा है, उसे देखते हुए वह अपना अनशन तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती। या उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिलती।

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