नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पिछले वर्ष उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में पीड़ितों को प्रदान मुआवजे को अपर्याप्त बताने व मुआवजा राशि बढ़ाने के मुद्दे पर जवाब मांगा है। याचिका में सरकार को मुआवजा राशि बढ़ाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र तथा दिल्ली सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न मुआवजा राशि बढ़ाई जाए। अदालत ने यह निर्देश दंगों में प्रभावित होने वाले कुछ लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
पिछले वर्ष संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान 24 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं। कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पें काबू से बाहर हो गई थीं। इनमें कम से कम 53 लोगों की जान चली गई थी तथा तकरीबन 200 लोग घायल हो गए थे।
याचिका में दिल्ली सरकार की सांप्रदायिक हिंसा पीड़ितों के लिए सहायता योजना के तहत प्रदान की गई 10 लाख रुपये की अंतरिम राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये का कुल मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि इन दंगों में शिव विहार में रहने वाले उनके मुवक्किलों के घरों व दुकानों में आगजनी व लूटपाट के कारण लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं कई ने तो ऋण भी लिया हुआ था। इस नुकसान के कारण उन्हें आजीविका चलाने में काफी परेशानी आ रही है। ऐसे में सरकार को उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।