नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी कांग्रेस की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहां की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। निचली अदालत ने इशरत जहां के खिलाफ आतंकरोधी कानून, यूएपीए के तहत दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिए दिल्ली पुलिस को अतिरिक्त समय दिया है। इस आदेश को इशरत जहां ने चुनौती दी है। उन्हें 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने समक्ष याची के वकील ललित वालेचा ने कहा कि निचली अदालत का फैसला गलत है क्योंकि जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त 60 दिनों का समय दिया गया, जबकि जांच के लिए तय 90 दिन का समय पहले ही पूरा हो चुका है। लिहाजा उस आदेश को रद्द किया जाए। वहीं दिल्ली पुलिस के वकील ने याचिका खारिज करने की मांग की।
दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा ने कहा कि वह राज्य और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश होने के लिए अधिकृत हैं। वहीं वकील अमित प्रसाद ने दावा किया कि दंगा मामले में पुलिस की तरफ से पेश होने के लिए उपराज्यपाल ने उन्हें विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है। हाईकोर्ट ने दोनों वकीलों को जिरह करने तथा स्थिति रिपोर्ट पेश करने की अनुमति दे दी। अदालत ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट कर दिया था कि वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहती कि कौन से वकील पुलिस का प्रतिनिधित्व करेंगे।