फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने से उच्च न्यायालय ने किया इनकार, बेटे की देखभाल के लिए नियुक्त चिकित्सा विशेषज्ञ के वेतन का मामला

Sat, 30 Apr 2022 05:39 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञ को ऐसे समय में नियुक्त किया गया था जब नाबालिग बेटे का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। लेकिन यह स्थिति आज नहीं है। ऐसे में 80 हजार रुपये का वेतन ज्यादा है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उच्च न्यायालय ने इकलौते बेटे की देखभाल के लिए नियुक्त चिकित्सा विशेषज्ञ को वेतन नहीं देने पर पति के खिलाफ अदालत की अवमानना कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञ को ऐसे समय में नियुक्त किया गया था जब नाबालिग बेटे का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। लेकिन यह स्थिति आज नहीं है। ऐसे में 80 हजार रुपये का वेतन ज्यादा है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनके सामने यह विवाद इस बात तक सीमित है कि वेतन का भुगतान न करना अवमानना होगा या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह फैमिली कोर्ट के आदेश की व्याख्या का मामला होगा। 

अदालत ने कहा बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर उनका मानना है कि वेतन की 80,000 राशि अत्यधिक अधिक है, जिसे एक बच्चे की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया है। पत्नी ने याचिका में आरोप लगाया था कि पति निचली अदालत के आदेश के पालन करने में असफल रहा है। 9 नवंबर 2021 को दिए आदेश में पति को अपार्टमेंट के किराए के रूप में 4.25 लाख का भुगतान करने के साथ-साथ पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए रखरखाव के रूप में 1 लाख और दैनिक किराने का सामान के लिए 1 लाख का भुगतान करने के लिए कहा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें