नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 1997 के उपहार अग्निकांड मामले से जुड़े साक्ष्य नष्ट व गायब करने के मामले में निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य मामले में रियल एस्टेट कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल को दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। सुशील अंसल ने जांच अधिकारी से जिरह के लिए याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने मामले की सुनवाई 14 सितंबर तय की है। अदालत ने अंसल के उस तर्क को खारिज कर दिया कि याचिका के निपटारे तक ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर रोक लगाई जाए।
अंसल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरि हरन ने अदालत को बताया कि निचली अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उनकी याचिका का निपटारा किया है। उन्होंने कहा मामले में वह जांच अधिकारी से जिरह करने के लिए एक और अवसर की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति करते हुए कहा कि निचली अदालत में सुनवाई अंतिम चरण में है। अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष के साक्ष्य पेश करने की सुनवाई पूरी हो चुकी है।
पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने तर्क दिया कि यह एक खेल का हिस्सा है कि जब सब कुछ खत्म हो गया यानि जिरह पूरी हो गई तो सुशील अंसल ने आवेदन दायर कर दिया। उन्होंने कहा संबंधित अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है। अब पुन: गवाहों से पूछताछ की इजाजत देना उचित नहीं है। मामला पिछले काफी अरसे से लटका हुआ है और यह महत्वपूर्ण है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है।
वहीं उपहार पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने भी आवेदन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मामले में कुल 43 गवाहों को बुलाया गया है। उनमें से अधिकांश सुशील अंसल के अधिवक्ता ने पेेश किए हैं।