नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर आयोजित रैली में सांप्रदायिक नारे लगाने और एक धर्म विशेष के खिलाफ प्रचार के लिए युवाओं को उकसाने के मामले में आरोपी हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष भूपिंदर तोमर उर्फ पिंकी चौधरी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह रैली 8 अगस्त को हुई थी। अदालत ने कहा प्रथम दृष्टया सभी तरह के नारे और भाषण देने की बात सामने आई है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने फिलहाल आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा पुलिस की रिपोर्ट पर ही कोई निर्णय किया जाएगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 13 सितंबर तय की है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान आरोपी को अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा वे जानना चाहती है कि याची नारेबाजी के समय कहां था। क्या आप प्रदर्शन में मौजूद नहीं थे?
तोमर की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनका मुवक्किल कार्यक्रम का आयोजक नहीं था। उन्हें मामले में पहले निचली अदालत ने गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। अभियोजन पक्ष के वकील तरंग श्रीवास्तव ने बताया कि वह कथित आपत्तिजनक नारेबाजी का वीडियो और अन्य सामग्री अदालत के समक्ष पेश कर चुके हैं।
इस मामले में हाल ही में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने भूपिंदर तोमर उर्फ पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि हम तालिबान राज्य नहीं हैं। अदालत ने कहा था कि अतीत में इस तरह की घटनाओं ने सांप्रदायिक तनाव भड़काया है जिससे दंगे हुए हैं और जान-माल का नुकसान हुआ है।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि हम तालिबान राज्य नहीं हैं यहां कानून का राज, हमारे बहुसांस्कृतिक और बहुलतावादी समुदाय के शासन का पवित्र सिद्धांत है। आज जब पूरा भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब कुछ ऐसे लोग हैं जो अब भी असहिष्णु और स्वकेन्द्रित मानसिकता में जकड़े हुए हैं।
अदालत ने कहा था कि जो साक्ष्य उपलब्ध हैं उससे मामले में आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट है और आरोपी पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
पुलिस ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि आरोपियों ने जंतर-मंतर पर मंच का इस्तेमाल सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने और अपनी योजनाओं को सांप्रदायिक रंग देने के लिए किया, युवाओं को एक विशेष धर्म के खिलाफ उकसाया, जबकि सक्षम प्राधिकारी ने सभा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।