हाईकोर्ट ने तस्करी के 9 आरोपियों को जमानत देते हुए कहा कि सोने की तस्करी आतंकी कृत्य नहीं है, इससे भारत की आर्थिक सुरक्षा को खतरा नहीं है। कोर्ट ने ने 2020 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जब्त किए गए 83.6 किलोग्राम सोने की तस्करी में शामिल होने के आरोप में नौ लोगों को जमानत दी है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सोने की तस्करी से भारत की आर्थिक सुरक्षा या मौद्रिक स्थिरता के लिए खतरा नहीं है। इसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी कृत्य भी नहीं माना जा सकता। अदालत ने सोने की तस्करी के 9 आरोपियों को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की पीठ ने 2020 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जब्त किए गए 83.6 किलोग्राम सोने की तस्करी में शामिल होने के आरोप में नौ लोगों को जमानत दी है। पीठ ने कहा कि कब्जा, उपयोग, उत्पादन, नकली मुद्रा या सिक्के का हस्तांतरण अपराध है, हालांकि सोने का उत्पादन व उपयोग आदि स्वयं अवैध या अपराध नहीं है।
आरोप है कि आरोपियों को अगस्त 2020 में 500 से अधिक सोने के बिस्कुट (83.6 किग्रा) के साथ पकड़े जाने के बाद राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने हिरासत में लिया था। वे फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे।
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इनमें से आठ- रायकिरण बालसो गायकवाड़, सद्दाम रमजान पटेल, दिलीप लक्ष्मण पाटिल, पवन कुमार मोहन गायकवाड़, अवधूत अरुण विभूते, सचिन अप्पासो हस्बे, अभिजीत नंद कुमार बाबर और योगेश हनमंत रूपनार को मौके पर ही डीआरआई ने गिरफ्तार कर लिया। उनके बयानों के आधार पर आरोपी वैभव संपत मोरे को बाद में हिरासत में ले लिया गया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बाद में इस मामले को अपने हाथ में ले लिया और उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध करने का आरोप लगाया।