नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट के जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) को उन मामलों का विवरण खोजकर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था, जिनमें फैसले सुरक्षित रखे गए थे, लेकिन दो महीने के भीतर सुनाए नहीं गए थे। अदालत ने यह कहते हुए आदेश रद्द किया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम लोक प्राधिकरणों पर ऐसी सूचना बनाने या संकलित करने का दायित्व नहीं डालता, जो उनके पास मौजूद ही नहीं है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने टिप्पणी की कि फैसलों का समय पर सुनाया जाना निस्संदेह जनहित का विषय है, लेकिन व्यापक जनहित का हवाला देकर किसी लोक प्राधिकरण को ऐसी सूचना तैयार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जो उसके अभिलेखों में मौजूद ही नहीं है। अदालत जन सूचना अधिकारी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पूर्व न्यायिक अधिकारी पीडी गुप्ता की ओर से दायर आरटीआई आवेदन पर पारित सीआईसी के 26 मई, 2011 के आदेश को चुनौती दी गई थी। गुप्ता ने एक विशेष न्यायाधीश द्वारा एकल पीठ या खंडपीठ के हिस्से के रूप में सुने गए उन सभी मामलों का विवरण मांगा था, जिनमें बहस पूरी होने के दो महीने से अधिक समय बाद फैसले सुनाए गए थे। ब्यूरो