लावारिस कुत्तों के लिए भोजन का अधिकार संबंधी हाईकोर्ट का फैसला पशु प्रेमियों के लिए एक उपलब्धि है। यह बात फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए पशु चिकित्सा में चौथे वर्ष की छात्रा व ऑस्कर फॉर लाइफ ट्रस्ट की संस्थापक विभा तोमर ने शनिवार को कही। विभा ने लॉकडाउन में प्रतिदिन करीब 500 लावारिस कुत्तों को भोजन करवाया और अब भी रोजाना उन्हें करवाती हैं।
विभा ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला हम पशु प्रेमियों के लिए उपलब्धि है। हमारी तरह ही लावारिस कुत्तों को भोजन की जरूरत है। उन्हें भोजन देने के लिए स्थान निर्धारित होना चाहिए ताकि उन्हें बिना किसी विवाद के भोजन मिलता रहे।
उन्होंने धन्यवाद करते हुए कहा कि इस आदेश के बाद हम पशु प्रेमी खुश हैं कि अब हमें किसी विवाद या उन लोगों के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा जो कुत्तों को पसंद नहीं करते। अब हम में से प्रत्येक को लावारिस कुत्तों को भोजन देने और विरोध करने वालों का मुकाबला करने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने एक जुलाई को अपने फैसले में कहा था कि ये जागरूकता फैलाने की जरूरत है कि पशुओं को भी सम्मान और गरिमा से जीने का अधिकार है। लावारिस कुत्तों को भी भोजन का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें भोजन देने का अधिकार है। बशर्ते इस अधिकार का प्रयोग करते हुए सावधानी और सतर्कता बरती जाए ताकि इससे अन्य लोगों के अधिकार प्रभावित न हो और किसी को नुकसान न हो।
अदालत ने कहा था कि लावारिस कुत्तों को उन्हीं स्थानों पर भोजन दिया जाना चाहिए, जिनका निर्धारण एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) आरडब्ल्यूए एवं स्थानीय निकायों की मशविरे के बाद करेगा। ये स्थान निर्धारित करते समय ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि लावारिस कुत्ते एक स्थान विशेष पर रहते हैं और उन्हें उसी स्थान पर भोजन दिया जाना चाहिए जहां वे रहते हैं।
वहीं अदालत ने ये भी कहा कि पशुओं की देखभाल करने वालों या भोजन कराने वालों की अनुपस्थिति में प्रत्येक लावारिस कुत्ते को भोजन-पानी मिले ये स्थानीय आरडब्ल्यूए अथवा स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी होगी।
न्यायमूर्ति जेआर मिढ्ढा ने अपने फैसले में समाचार पत्रों, टीवी, रेडियो तथा सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये पशुओं के प्रति जागरूकता फैलाने का निर्देश एडब्ल्यूबीआई को दिया था। उन्होंने कहा था कि कानूनन पशुओं के साथ करुणा, सम्मान और गरिमा से पेश आया जाना चाहिए। इसलिए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक के साथ सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों की है।