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हाईकोर्ट: शराब पीने की कानूनी न्यूनतम उम्र को 25 से घटाकर 21 साल करने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब

Tue, 24 Aug 2021 08:00 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रसन्ना एस ने चिंता जताते हुए कहा कि नई शराब नीति 2021-22 के तहत शराब खरीदने वालों की उम्र को सत्यापित करने के लिए वर्तमान में कोई मजबूत तंत्र नहीं है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक गैर-लाभकारी संगठन 'कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग' की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में शराब पीने की कानूनी न्यूनतम उम्र को 25 से घटाकर 21 साल करने चुनौती दी गई है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने इस मुद्दे पर पहले से दायर याचिका के साथ सुनवाई करने का निर्णय करने का निर्णय करते हुए सुनवाई 17 सितंबर तय कर दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रसन्ना एस ने चिंता जताते हुए कहा कि नई शराब नीति 2021-22 के तहत शराब खरीदने वालों की उम्र को सत्यापित करने के लिए वर्तमान में कोई मजबूत तंत्र नहीं है। याची ने तर्क रखा कि शराब पीने की उम्र में इस प्रकार से कमी करने से कम उम्र में शराब पीने, शराब पीकर गाड़ी चलाने और रोड-रेज के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
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दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि वर्तमान में मतदान की उम्र 18 साल है। उन्होंने कहा कि यह सुझाव देना कि 18 वर्ष से ऊपर के लोग शराब नहीं पी सकते, हाथी दांत के टॉवर में रहना है। सिर्फ इसलिए यह तर्क कि आप लोगों को 18 साल की उम्र में शराब पीने की अनुमति देते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप शराब पीकर गाड़ी चलाने की अनुमति देते हैं। यहां तक कि 50 साल के व्यक्ति को भी कानून के मुताबिक शराब पीकर गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं है।

वहीं दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने भी दलील दी कि यह शैडोबॉक्सिंग के अलावा और कुछ नहीं है। पड़ोसी राज्यों में इसी तरह की नीतियां लागू हैं। किसी भी मामले में कानून के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए सरकार ने निर्देश मांगने के लिए समय मांगा। अदालत ने उनके आग्र को स्वीकार कर मामले की सुनवाई सितंबर तय कर दी।

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