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हाईकोर्ट ने किया साफ : अपने मौलिक अधिकारों से दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण अमान्य

Sun, 31 Oct 2021 05:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि स्ट्रीट वेंटरों के पास मौलिक अधिकार है, लेकिन दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं कर सकते
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्ट्रीट वेंडरों के पास मौलिक अधिकार है लेकिन जब तक वे सार्वजनिक तरीके से उपयोग करते हैं। यदि दूसरों के अधिकारों यानी चलने के अधिकारों का अतिक्रमण करते है तो यह लागू नहीं माने जा सकते।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व जसमीत सिंह की खंडपीठ ने शनिवार को भी स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि फेरीवालों को हर बाजार में बैठने के लिए उचित स्थान और उचित कियोस्क मिलने चाहिए। उनके पास उचित लाइसेंस होना चाहिए। अदालत ने कहा, इसके बाद आपको पुलिस को % हफता % का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। 

अदातल ने पूछा कि इस एक्ट को लागू करने में क्या अड़चन है। पिछले सात वर्षों के लिए झिझक क्या है?ॐ पीठ ने कहा कि अधिकारियों को सुरक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता, सड़क आदि जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट वेंडिंग प्लान के साथ आना चाहिए।
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पीठ ने कहा अधिकारियों को हर पांच साल में एक योजना की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य से अब के लिए कोई योजना नहीं है। जो लोग बैठ गए हैं, उन्हें अपनी संपत्ति और आय का खुलासा करने की आवश्यकता होनी चाहिए। सड़कों पर बेचने वालों के मौलिक अधिकार हैं लेकिन कोई अधिकार निरपेक्ष नहीं है। यहां तक कि अगर वह पुराना बैठने वाला भी है, तो उसे अन्य को चलने के लिए रास्ता देना चाहिए। जब आप सार्वजनिक तरीके या सड़क का उपयोग करना चाहते हैं, तो आप किसी और के चलने के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं।

पीठ ने कहा हम चाहते है कि आप को कोई झू न सके लेकिन आपको भी नियमों का पालन करना होगा, आपको क्षेत्र का घनत्व देखना होगा, कि कितने वेंड्स की अनुमति दी जा सकती है। कनॉट प्लेस क्षेत्र में दुकान मालिकों और ऑपरेटरों की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव रल्ली ने इस मुद्दे पर पीठ के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी हॉकर अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता।

सुनवाई के दौरान कुछ वकील ने मामले में हस्तक्षेप करने और निवेदन करने की कोशिश की तो अदालत ने कहा, हम पहले यह देखना चाहते हैं कि क्या निर्णय दिए गए थे, फिर उस संदर्भ में हम देखना चाहते हैं कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कैसे आया। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 नवंबर तय की है।

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