नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी जेठ को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि सुसाइड नोट व प्राथमिकी में आरोपी पर स्पष्ट आरोप नहीं है। ऐसे में वह जमानत पाने का हकदार है।
न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने अपने फैसले में कहा कि दर्ज प्राथमिकी में स्पष्ट आरोप नहीं है। सुसाइड नोट व प्राथमिकी में मात्र पति व ससुर पर ही प्रताड़ना का आरोप है। इसके अलावा प्राथमिकी में प्रताड़ना की तिथि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। अदालत ने आरोपी को केे 25 हजार रुपये के निजी मुचलके व दो अन्य जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी अपना फोन नंबर जांच अधिकारी को देगा व फोन बंद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा वह बिना अदालत की इजाजत दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा।
पेश मामले के अनुसार मृतका की मां फरीदा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उनकी बेटी का निकाह आरोपी अमीर अली से वर्ष 2019 में हुआ था। निकाह के समय भी आरोपियों ने एसी और कार की मांग की और बाद में मकान खरीदने के लिए पैसे मांगे।
उन्होंने शिकायत में कहा कि पति व ससुर आबिद अली ने उनकी बेटी को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके अलावा उसे कमरे में बंद कर बिना खाने के रखा जाता था। कई बार बेटी ने इस बारे में शिकायत भी की। एक फरवरी 21 को पति अमीर अली ने सूचना दी कि उसकी बेटी की मृत्यु हो गई है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतका के पास से सुसाइड नोट भी बरामद किया जिसमें उसने पति व परिवार पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। आरोपी वसीम अली के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को फर्जी तरीके से फंसाया गया है। आरोप पत्र के अलावा उनका मामले से कोई लेनादेना नहीं है।