नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह सार्वजनिक सेवा केंद्रों (सीएससी) पर दृष्टिबाधित छात्रों को ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) के लिए लेखक उपलब्ध करवाए। स्नातक अंतिम वर्ष के दृष्टि बाधित छात्रों के लिए दायर याचिका पर यह निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की गई है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि डीयू यह सुनिश्चित करे कि सीएससी पर परीक्षा देने वाले ऐसे छात्रों को लेखक से वंचित नहीं किया जाए, जो पहले ही इस बारे में विश्वविद्यालय को सूचित कर चुके हों। पीठ ने डीयू को को इन छात्रों को प्रत्येक पेपर की कम से कम दो पठन सामग्री प्रदान करने का भी निर्देश दिया। डीयू से अनुरोध करने के लिए छात्रों को एक सप्ताह का समय दिया गया है।
वहीं पीठ ने कहा कि ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस के रूंगटा ने दृष्टिबाधित छात्रों को सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए सहमति दी है। साथ ही पीठ ने विश्वविद्यालय को ओबीई में हिस्सा लेने वाले छात्रों के परीक्षा परिणाम की तय तारीख बताने को भी कहा। यह याचिका प्रतीक शर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के जरिये दायर की गई है।
इस बीच पीठ ने सिब्बल के उस सुझाव पर भी सहमति जताई, जिसमें डीयू से परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के संबंध में एक शपथपत्र देने की बात कही गई। पीठ ने डीयू को निर्देश दिया कि वह उन छात्रों की संख्या भी बताए जिन्होंने ऑनलाइन परीक्षा में पंजीकरण और लॉगइन किया था।
डीयू में 10-31 अगस्त के बीच स्नातक के अंतिम वर्ष के लिए ऑनलाइन ओबीई आयोजित करने की तैयारी है। सार्वजनिक सेवा केंद्रों की स्थापना ऐसे छात्रों के लिए गई है, जिनके पास ओबीई में भाग लेने के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं है।