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जामिया हिंसा मामले में एसआईटी और जांच आयोग की मांग का पुलिस ने किया विरोध

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नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों पर कथित बर्बरता की एसआईटी जांच अथवा जांच आयोग बनाने की मांग का दिल्ली पुलिस ने बुधवार को विरोध किया। हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर पुलिस बर्बरता की जांच के लिए एसआईटी और जांच आयोग गठित करने की मांग की गई है। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष बुधवार को पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने दलील दी कि पुलिस के खिलाफ दायर याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं है। याचिकाओं में जो भी राहत मांगी जा रही है, वह नहीं दी जा सकती क्योंकि हिंसा के मामले में आरोपपत्र दायर किया जा चुका है।
हालांकि उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को जो भी राहत चाहिए थी, उसकी मांग निचली अदालत में करनी चाहिए थी। अगर पुलिस के खिलाफ फैक्ट फाइंडिंग कमेटी या एसआईटी गठित की गई तो कानून को दबाने का काम होगा। यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति दाखिल होने के मुद्दे पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस को शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश से वंचित नहीं किया गया है।
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वहीं, हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए छात्रों को मुआवजा देने देने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब यह तय हो जाए कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी में दाखिल होकर कोई उल्लंघन किया। अभी इसकी जांच जारी है। याचिकाकर्ताओं के आरोप पुलिस द्वारा गलत काम करने की धारणा पर आधारित है और इनमें विवादित प्रश्न शामिल हैं। इसके लिए रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की जांच की जानी है।
कोर्ट में मंगलवार को छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और इंदिरा जयसिंह ने पुलिस पर कड़े आरोप लगाते हुए एसआईटी और जांच आयोग गठित करने की मांग की थी। उन्होंने बिना अनुमति यूनिवर्सिटी घुसकर छात्रों पर बल प्रयोग करने को बेहद बर्बरता पूर्ण बताया था।
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