नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के मद्देनजर सर्कस में जानवरों की वास्तविक जानकारी जुटाने में लापरवाही बरतने पर भारत पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबी) की खिंचाई की। पीठ ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब सर्वे करने का आदेश दिया गया तो केवल पत्र व्यवहार से ही जानकारी कैसे जुटाई जा सकती है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने एडब्ल्यूबी से पूछा कि जब पंजीकृत सर्कसों में सर्वेक्षण के जरिए जानवरों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कहा गया तो आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया? जब तक सर्कस में जानवरों की फोटो, वीडियो रिकॉर्डिंग और उनके रखे जाने की जगह की हालत के बारे में वास्तविक जानकारी नहीं जुटाई जाती, सर्वेक्षण का मकसद पूरा नहीं होगा।
पीठ ने एडब्ल्यूबी को सर्कसों में जानवरों की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट पेश करने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है। इससे पहले पीठ ने एडब्ल्यूबी को फेडरेशन फॉर एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दायर याचिका पर एडब्ल्यूबी को आदेश दिया था कि सर्कसों में जानवरों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया जाए।
पीठ ने कहा था कि एडब्ल्यूबी को सर्कस अधिकारियों से इस बारे में विशेष रूप से पूछताछ करनी चाहिए कि क्या वे कोरोना महामारी के दौरान जानवरों की देखभाल कर पाने की स्थिति में हैं या उनके पुनर्वास के लिए नजदीकी प्राणि उद्यान में भेजे जाने की जरूरत है। पीठ ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया था कि इस बारे में किए गए सर्वेक्षण की स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए।