चिराग गुप्ता
नई दिल्ली।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती ईंधन लागत के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दी जा रही विभिन्न सुविधाएं भी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित कर रही हैं।
ऑटोमोबाइल आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक दो-पहिया, तीन-पहिया और गाड़ियों की बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार में पेट्रोल पर बढ़ते मासिक खर्च से बचने के लिए उपभोक्ता अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनकी रनिंग कॉस्ट कम हो। इलेक्ट्रिक वाहन इस जरूरत को काफी हद तक पूरा कर रहे हैं।
सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए। कई योजनाओं के तहत खरीदारी पर सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और उत्पादन क्षेत्र को प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में 1 से 1.5 लाख तक के अतिरिक्त लाभ इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीद पर उपलब्ध हैं। इससे वाहनों की शुरुआती लागत कम हो जाती है और खरीदार आकर्षित होते है।
हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर चुनौतियां पूरी तरह कम नहीं हुई है, लेकिन उपभोक्ताओं की सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। जहां पहले वाहन खरीदते समय केवल कीमत और ब्रांड देखा जाता था, वहीं अब ग्राहक वाहन के ईंधन पर होने वाले खर्च को भी प्राथमिकता दे रहे है।