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दिल्ली : फिर धधकी गाजीपुर लैंडफिल साइट की आग, लपटें काबू में मगर अंदर भड़क रहे हैं शोले

Mon, 11 Apr 2022 01:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

हर साल गर्मियों में यहां कूड़े के पहाड़ में आग लगती है। यह आग ज्यादातर हल्की होती है लेकिन इस बार आसानी से नहीं बुझ रही क्योंकि आग कूड़े के पहाड़ के भीतरी हिस्से में लगी है और सुलग रही है। 
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गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गर्मी बढ़ने के साथ तेज हवा बही तो गाजीपुर कूड़े के पहाड़ में लगी आग धधकने लगी। शनिवार की रात को गाजीपुर लैंडफिल साइट के निचले हिस्से में एक बार फिर आग की लपटें निकलने लगीं। 

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गाजीपुर लैंडफिल साइट के आस पास के लोग और पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अधिकारी दोनों मानते हैं, हर साल गर्मियों में यहां कूड़े के पहाड़ में आग लगती है। यह आग ज्यादातर हल्की होती है। लेकिन इस बार यह आसानी से नहीं बुझ रही। क्योंकि आग कूड़े के पहाड़ के भीतरी हिस्से में लगी है, यह निरंतर सुलग रही है और कभी भी तेज जलने लगती है।

28 मार्च को गाजीपुर लैंडफिल साइट के ऊपरी हिस्से में आग लगी थी, जिसे शांत करने में फायर ब्रिगेड को खासा मशक्कत करनी पड़ी। तीन दिन तक आग को बुझाया नहीं जा सका। दमकल की गाड़ियों को लैंडफिल साइट के ऊपरी हिस्से तक पानी की बैछारें पहुंचाना आसान नहीं था। इसलिए चौथे दिन लैंडफिल साइट पर दमकल की गाड़ियां पीछे हट गईं, बुलडोजरों से आग लगे हिस्से को ढहाने का काम किया गया। ऐसा करने से आग बुझने के बजाय मलबे के नीचे दब गई।
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दस दिन बाद फिर से उठीं लपटें
गाजीपुर लैंडफिल साइट को 31 मार्च को देखने पर लगा, कि यहां कोई आग नहीं लगी। लेकिन कचरे के नीचे दबी आग निरंतर सुलग रही थी। आखिरकार दस दिन बाद शनिवार को रात साढ़े दस बजे फिर से यहां आग की लपटें निकलने लगीं। इस बार आग लैंडफिल साइट के निचले हिस्से में लगी।

बरसात होने पर ही बुझेगी आग
गाजीपुर लैंडफिल साइट के पास रहने वाले स्थानीय बुजुर्गों और अनुभवी लोगों का कहना है कि अब ये आग आसानी से नहीं बुझेगी। दयाल चौधरी ने कहा कि ये बरसात होने पर शांत होगी। क्योंकि कूड़े के पहाड़ से निरंतर मीथेन गैस निकलती है, गर्मियों में इसमें अपने आप आग लग जाती है।

टीले पर कौन आग लगाने जाएगा
घड़ौली गांव के सुनील चौधरी ने कहा कि कूड़े के टीले पर आग लगाने कौन जाएगा। सबसे ऊंचाई वाले हिस्से में तो कूड़ा बीनने वाले भी नहीं जाते। वर्ना ये माना जा सकता था कि किसी ने बीड़ी-सिगरेट पीकर वहां फेंका होगा, लेकिन इस बार आग टीले पर ही लगी थी।

भीतर से सुलग रहा कूड़े का पहाड़
गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े का पहाड़ अबतक सुलग रहा है। दूर से भले न दिखे, लेकिन लैंडफिल साइट के नजदीक जाने पर धुएं की दुर्गंध महसूस होती है। जिस तरफ हवा कारुख होता है, उस तरफ जले कूड़े की दुर्गंध से लोग परेशान होते हैं।

लैंडफिल की राख कर रही परेशान
लैंडफिल साइट के आस-पास के गांव घड़ौली, गाजीपुर और पास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को जले कचरे की राख परेशान कर रही है। आते-जाते दो पहिया वाहन चालकों की आंख में राख पड़ रही है, इससे लोग खासा परेशान हैं।

सबसे लंबे समय तक आग का रिकार्ड
इस साल गाजीपुर लैंडफिल साइट पर सबसे लंबे समय तक आग लगने का रिकार्ड भी बन गया है। इससे पहले 2020 में लगातार तीन दिन तक यहां कूड़ा जलता रहा था, लेकिन इस बार तीन दिन यहां तेज आग लगी रही, लेकिन इसके बाद से कचरा लगातार सुलग रहा है।

गाजीपुर कूड़े के पहाड़ में फिर से आग लगी। दिल्ली के लोग फिर से परेशान हैं। लेकिन भाजपा शासित एमसीडी का कहना है कि उनके पास इस कूड़े के पहाड़ का कोई समाधान नहीं है। अब तो एमसीडी सीधा मोदी जी सम्भालेंगे। क्या अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस समस्या का समाधान करेगा?
-आतिशी, आप विधायक

मीथेन गैस निकलने के कारण हर साल लैंडफिल साइट पर आग लगती है। शनिवार को तापमान बहुत ज्यादा था, इसलिए फिर से वहां आग लग गई। लेकिन हमारे फायर ब्रिगेड के जांबाज कर्मचारियों ने कम समय में इसपर काबू पा लिया। आम आदमी पार्टी के विधायक अपने हिस्से का काम तो सही से करा नहीं पा रहे, इसलिए निगम के काम काज में कमियां निकालते रहते हैं। पीडब्ल्यूडी और फ्लड विभाग के नाले मलबे से भरे हैं, आम आदमी पार्टी को नालों की सफाई करानी चाहिए।
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-श्याम सुंदर अग्रवाल, महापौर, पूर्वी दिल्ली नगर निगम

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