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समलैंगिक विवाह का मामला: हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास से मांगा जवाब 

Tue, 06 Jul 2021 11:45 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने सभी को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 27 अगस्त तय की है। खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पहले से दायर सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने नागरिकता अधिनियम, विदेशी विवाह अधिनियम, और विशेष विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिका पर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने विदेशी नागरिकता (ओसीआई) कार्डधारक के विदेशी मूल के जीवनसाथी को उसके लैंगिक की परवाह किये बगैर ओसीआई पंजीकरण की अनुमति देने की मांग की है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने सभी को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 27 अगस्त तय की है। खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पहले से दायर सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। इससे पहले हिंदू, विशेष और विदेशी विवाह अधिनियमों के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग की गई है।

याचिका ने कहा कि सम लैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14,15,19 और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है, भले ही व्यक्ति का लिंग, लैंगिक कुछ भी हो। इसमें कहा गया है कि भारत में प्रभावी कानून, नियमों और नीतियों के तहत समलैंगिक विवाहों को कानूनी रूप से मान्यता दी जानी चाहिए।
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याचिकाकर्ता समलैंगिक दंपती- जॉयदीप सेनगुप्ता (ओसीआई) और अमेरिकी नागरिक रसेल ब्लेन स्टीफंस- और भारतीय नागरिक मारियो डी. हैं। मारियो समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता हैं जो अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं।

अधिवक्ता करुणा नंदी, रुचिरा गोयल के जरिये दायर अपनी याचिका में तीनों ने अदालत को बताया कि सेनगुप्ता और स्टीफंस करीब 20 सालों से रिश्ते में हैं और छह अगस्त 2012 को उन्होंने न्यूयॉर्क में शादी भी कर ली थी जिसे अमेरिका, फ्रांस और कनाडा में मान्यता प्राप्त है। दंपती अब अपनी पहली संतान की तैयारी कर रहा है और जुलाई 2021 में उसके जन्म की उम्मीद है। 

स्टीफंस अपने लिए ओसीआई दर्जा चाहता है और ऐसे में कानूनी स्थिति जानने के लिये उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून का इस्तेमाल किया, लेकिन जब मंत्रालयों से उन्हें इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 

फरवरी में केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को गैरकानूनी घोषित करने के बावजूद समलैंगिक विवाह देश में मौलिक अधिकार नहीं है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि समान लिंग के जोड़े को पार्टनर के रूप में एक साथ रहने और यौन संबंध रखने की तुलना एक 'भारतीय परिवार इकाई' के साथ नहीं की गई। 

केंद्र सरकार ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अधीन है और समलैंगिक विवाह न तो मान्यता प्राप्त है और न ही किसी भी अशोधित व्यक्तिगत कानूनों या किसी संहिताबद्ध सांविधिक कानूनों में स्वीकार किए जाते हैं।

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