महर्षि वाल्मीकि मंदिर के स्वामी कृष्ण साह विद्यार्थी
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नई दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित बापू निवास की दीवारों पर लगी तस्वीरें भले ही धुंधली होने लगी हैं, मगर 75 साल पहले देश की आजादी के लिए संग्राम से जुड़ी यादें एक बार फिर यहां आकर ताजा हो जाती हैं। वाल्मीकि मंदिर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक अप्रैल, 1946 से जून से 1947 के दौरान 214 दिन बिताए थे। इसी मंदिर में गांधीजी प्रार्थना करते थे, अब रोजाना देश के अलग अलग राज्यों से लोग इस जगह को देखने पहुंचते हैं।
बापू वाल्मीकि मंदिर परिसर में बने एक हॉलनुमा कमरे में रहते थे। यहां अभी भी बिस्तर है, जिसपर गांधीजी विश्राम किया करते थे। उनकी एक तस्वीर भी है, जहां उनकी स्मृतियों को संजोया गया है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सेनानियों के अलावा ब्रिटिश अधिकारी भी महात्मा गांधी से मुलाकात के लिए पहुंचते थे।
महर्षि वाल्मीकि मंदिर के स्वामी कृष्ण साह विद्यार्थी बताते हैं कि देश की आजादी से पहले राष्ट्रपिता यहां 214 दिन के लिए रुके थे। स्वामी ने बताया कि बापू ने मंदिर पहुंचने के बाद समाज के लोगों से यहां रुकने की इजाजत मांगी थी।
जिस कमरे में बापू रुके थे, उसमें वाल्मीकि समाज के साधु-संत पहले रहते थे। यहां एक स्कूल भी संचालित होता था, जिनके बच्चों को गांधीजी ने पढ़ाने की इच्छा भी जताई थी।रोजाना सुबह उठकर स्नान के बाद वह मंदिर के प्रांगण में ध्यान लगाते थे।
स्वामी कृष्ण साह विद्यार्थी ने बताया कि बापू से मिलने के लिए लेडी माउंटबेटन, राजकुमारी अमृत कौर, सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत कई स्वतंत्रता सेनानी और अंग्रेज अधिकारी भी पहुंचते थे। शाम के वक्त बापू मंदिर प्रांगण में भजन पाठ और प्रार्थना भी करते थे।