वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच को सामान्य बता रहे हैं। उनका कहना है कि पूछताछ के दौरान यदि कोई संज्ञेय अपराध सामने आएगा तो पूर्व मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। गौतम से हुई पूछताछ में कार्यक्रम के आयोजन और आयोजकों के बारे में जानकारी प्राप्त की गई। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मंत्री ने पूछताछ में सहयोग किया। आगे भी उन्होंने जांच में सहयोग करने का वादा किया है। पुलिस जल्द ही कार्यक्रम के आयोजनकर्ताओं को भी थाने बुलाकर उनसे पूछताछ करेगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद दोपहर करीब 2.20 बजे राजेंद्र पाल गौतम पहाड़गंज थाने पहुंचे। यहां पुलिस अधिकारियों ने उनका लिखित बयान लिया। गौतम से पूछा गया कि किसके बुलावे पर वह पांच अक्तूबर को अंबेडकर भवन में आयोजित हुए कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम किसने आयोजित किया था। क्या पूर्व मंत्री को पहले से पता था कि दीक्षा कार्यक्रम में क्या होने वाला है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मंत्री ने पुलिस से कहा है कि इस तरह का कार्यक्रम हर साल अंबेडकर भवन में होता रहता है। कार्यक्रम में न तो किसी की निंदा की गई और न ही किसी का अपमान किया गया। सिर्फ राजनीति करने के लिए यह सब हो रहा है।
पुलिस की पूछताछ के बाद पूर्व मंत्री ने थाने में बिना वजह बिठाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि उनके बयान को पुलिस उपायुक्त को दिखाने की बात कर उनको कई घंटे थाने में रोककर रखा गया। जिसकी वजह से उनके कई कार्यक्रम भी छूट गए। शाम करीब छह बजे के बाद वह थाने से निकल गए। बता दें कि सोमवार को भी पुलिस की एक टीम ने पूर्व मंत्री के घर जाकर उनसे बातचीत की थी। उनसे कहा गया था कि जब उनका बुलाय जाएगा तो उनको थाने आना होगा।
पांच अक्तूबर को पहाड़गंज, रानी झांसी रोड स्थित अंबेडकर भवन में बौध धर्म के कार्यक्रम में कुछ लोगों का धर्मांतरण कराकर उनको दीक्षा दिलाई गई थी। इस कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं की कथित तौर पर निंदा कर उनको न मानने की शपथ ली गई थी। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम मंच पर ही उपस्थित थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता की ओर से इस संबंध में दिल्ली पुलिस को शिकायत दी गई थी। विवाद सामने आने के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने रविवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस ने मंगलवार को इसी संबंध में पूर्व मंत्री से पूछताछ की है।