बाढ़ से उफान पर चल रही यमुना नदी में पांच दिन से दो नौजवान इसे तैर कर अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किनारे नहीं पहुंच पाए। आखिरकार इन दोनों ने थक हार कर एक पेड़ पर सहारा लिया। कई घंटे इसी स्थिति में रहे। इस बीच रैपिड दौरे पर निकली रेस्क्यू टीम की नजर इन पर पड़ी। इन्हें रेस्क्यू किया गया।
टीम ने बताया कि आपदा के डर से दोनों नौजवानों की धड़कन तेज थीं। रेस्क्यू के बाद यह भी ठीक से नहीं बता नहीं पा रहे थे कि आखिर ये वहां पर कैसे फंसे रह गए। शुक्रवार शाम करीब सात बजे तहसीलदार विनोद कुमार सिंह दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ रैपिड दौरे पर यमुना के भीतर गए थे। तभी टॉर्च की रोशनी अचानक इन दोनों नौजवानों के ऊपर पड़ी। ये दोनों एक सूखे पेड़ पर सहारा लिए हुए थे।
रेस्क्यू के बाद इतना ही बता पाए कि डीएनडी की तरफ इनकी झुग्गियां थीं, जहां ये अपना कीमती सामान लेने के लिए गए थे। लेकिन तैरते-तैरते थक गए और इनका दिमाग सुन्न पड़ने लगा। जब इन्होंने देखा कि सूरज ढल रहा है और अंधेरा होने वाला है डूबने और सांपों के डर से ये पेड़ पर चढ़ गए।
पांच हजार लोगों की जान बचाई: डीडीएमए की रेस्क्यू टीम ने बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को दिन-रात बचाव व राहत कार्य किया। इंसानों सहित जानवरों को भी बचाया गया। पुलिस और जिला प्रशासन की एक टीम ने भी नौकाओं से यमुना में जाकर लोगों की जान बचाई। दूसरी तरफ एनडीआरएफ की नौकाएं और बचाव दल लोगों को निरंतर सुरक्षित यमुना से बाहर लेकर आए।
जिला प्रशासन के मुताबिक इस रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब पांच हजार लोग और एक हजार से ज्यादा कुत्ते, गाय बचाई जा चुकी हैं। वहीं सैकड़ों लोगों को बचाने के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ा। ये लोग इतनी भयावह स्थिति में भी बाहर निकलने को तैयार नहीं थे।
कदम-कदम पर नौकाएं डूबने का खतरा : बाढ़ वाले खादर क्षेत्र में किसानों ने खेतों की कंटीले तारों से घेराबंदी कर रखी है। ये कटीले तार हवा भरी नौकाओं (एयर इनफ्लेटेबल बोट) को किसी भी समय पंचर कर सकते हैं। विनोद कुमार ने बताया कि उनकी दो नौकाएं पंचर हो चुकी हैं।