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मुंडका में मातम : अपनों की तलाश में पथरा गईं आंखें, भटकते रहे परिजन, डीएनए से होगी मृतकों की पहचान

Sun, 15 May 2022 05:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अब तक 27 मृतकों में आठ की ही पहचान हो पाई है। दिनभर लोग हाथ में अपनों की तस्वीर लिए इधर-उधर भटकते रहे। रोते-बिलखते परिजनों की अपनों के इंतजार में आंखें पथरा गईं। शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।
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मुंडका में आग का तांडव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुंडका इलाके में शुक्रवार शाम इमारत में लगी आग में शवों के अवशेष मिलने से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। अब तक 27 मृतकों में आठ की ही पहचान हो पाई है। दिनभर लोग हाथ में अपनों की तस्वीर लिए इधर-उधर भटकते रहे। रोते-बिलखते परिजनों की अपनों के इंतजार में आंखें पथरा गईं। शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।

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पुलिस का कहना है, हादसे के बाद 31 लोग लापता हैं। इनमें कंपनी संचालक के पिता अमरनाथ भी शामिल हैं। वहीं, फोरेंसिक की दो टीमों ने शनिवार को मुंडका में घटनास्थल पर जांच की।  इस बीच, पुलिस ने सीसीटीवी और वाईफाई राउटर बनाने वाली कंपनी के संचालक भाइयों हरीश गोयल (48) और वरुण गोयल (38) को गिरफ्तार कर लिया है। 

इमारत की मालकिन सुशीला लाकड़ा, पुत्र मनीष लाकड़ा और पुत्रवधू सुनीता पर भी केस दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।  बिल्डिंग को अवैध रूप से बनाया गया था, इसलिए वहां आग से बचाव के भी कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि लाल डोरे में बनी इस इमारत में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिल्ली नगर निगम की ओर से कोई लाइसेंस भी जारी नहीं किया गया था।
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मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश्ा : दिल्ली सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। घटनास्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने का एलान किया। 

दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
हादसा बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। न्यायिक जांच के नतीजे आने पर पता चलेगा कि घटना के पीछे अधिकारी या एजेंसी में से कौन जिम्मेदार हैं। 
-मुख्यमंत्री, दिल्ली

पांच जिंदगियां बचाकर मधु खुद हो गई फना
बड़ी बहन सहित पांच महिलाओं को क्रेन से नीचे उतरने का हौसला देकर मदद करने वाली मधु खुद को नहीं बचा सकी। जिंदगी से जूझती महिला कर्मी ने एक बार क्रेन से नीचे उतरने की कोशिश भी की, लेकिन चंद सेकंड की देरी में क्रेन आगे निकल गई और मधु आग की लपटों में फंस गई। पेशे से ड्राइवर अमित ने बताया कि कुछ दिनों बाद उनकी शादी की 11वीं सालगिरह थी। दो बेटियां राधा (8) और प्रिया (4 ) की आंखें मां को अभी भी तलाश रही हैं।

कूलिंग ऑपरेशन के बाद भी इमारत गर्म
इमारत का तापमान इतना ज्यादा था कि दमकलकर्मियों द्वारा कूलिंग ऑपरेशन किए जाने के बाद भी पुलिस व जांच टीम को अंदर जाने में बहुत परेशानी हो रही थी।

लाशों के ढेर में बेटी को कैसे पहचानूं...
कोरोना ने पहले पति को छीन लिया, अब बेटी मुझसे दूर है। मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है? कोई सोनम से मिला दो, मैं एक बार उसे सीने से लगाना चाहती हूं, यह कहते हुए सुनीता बेहोश हो गई। मुंडका के प्रेमनगर निवासी सुनीता ने बताया, बेटी सुबह फैक्टरी पहुंच गई थी। जल्दी आने का कहकर गई थी। मॉर्चरी में लाशों का ढेर लगा है। डॉक्टर शवों में पहचान करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन बुरी तरह जलने के कारण सभी एक जैसे दिख रहे हैं। बेटी की तलाश कैसे करूं।

सगाई की अंगूठी से दृष्टि की शिनाख्त
अमन और दृष्टि की बीते वर्ष मार्च में सगाई हुई थी, नवंबर में शादी होेने वाली थी। दृष्टि दो साल से यहां काम कर रही थी और अमन लुधियाना में काम करता है। 12वीं तक पढ़ी दृष्टि शुरुआत से ही परिवार की जिम्मेदारी को लेकर सजग थी। यही वजह है कि पिता का साया उठने के बाद भाइयों के साथ घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए काम करती थी। शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन घर बसने से पहले ही उजड़ गया। शव बुरी तरह जल गया था। हाथ में सगाई की अंगूठी से दृष्टि की पहचान हुई।

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