भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत अब कृषि कानूनों के साथ दो और मोर्चे पर सरकार से लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि किसान यूनियन काले कृषि कानूनों के साथ ही गन्ने और बिजली के मुद्दे पर भी मोर्चेबंदी करेगी।
उन्होंने ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश में गन्ने का रेट सवा चार सौ से कम मंजूर नहीं होगा। सरकार ने अपने घोषणा पत्र में 370 रुपये का वादा साढ़े चार साल पहले किया था। अब उसके हिसाब से सरकार महंगाई और जोड़ ले। केंद्र सरकार ने अभी तक काले कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया। किसान यूनियन अब कृषि कानूनों के साथ गन्ने और बिजली के मुद्दे पर भी सरकार से लड़ेंगे।
27 सितंबर को भारत बंद
वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के कुल 40 संगठनों ने आम लोगों के साथ-साथ कई राजनीतिक पार्टियों से भी समर्थन मांगा है। भारत बंद के मद्देनजर दिल्ली समेत आसपास के कई राज्यों सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। आंदोलन के दस महीने पूरे होने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जाने से किसानों में नाराजगी है और अब वे आर-पार की मूड में दिख रहे हैं।
भारत बंद : क्या-क्या खुला रहेगा, क्या बंद?
भारत बंद को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि यह बंद सोमवार को सुबह 6 बजे से लोकर शाम चार बजे तक रहेगा। इस दौरान सभी सरकारी और निजी दफ्तर, शिक्षण संस्थान, दुकानें, उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। वहीं आपात प्रतिष्ठानों, सेवाओं, अस्पतालों, दवा की दुकानों, एंबुलेंस, राहत एवं बचाव कार्य और निजी इमरजेंसी सेवा पर कोई रोक नहीं रहेगी।
कई राजनीतिक दलों का समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद को कई राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बंद को अपना समर्थन दिया है। वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भारत बंद में शामिल होने की घोषणा की है। इसके अलावा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा, आंध्र प्रदेश सरकार, तृणमूल कांग्रेस ,माकपा, जेडीएस, तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके इस बंद को समर्थन देगी।