फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kisan Andolan News: सिंघु बॉर्डर पर शुरू हुई मोर्चे की बैठक, तैयार होगी आंदोलन की रणनीति

Sat, 27 Nov 2021 12:33 PM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

न्यूनतम समर्थन मूल्स सहित बकाया मांगों के समर्थन में जारी है आंदोलन। संयुक्त किसान मोर्चा की आज की बैठक में तय होगा आंदोलन का रुख, संसद कूच पर भी फैसला।
 
विज्ञापन
Kisan Andolan: किसान महापंचायत में राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर सरकार की हामी के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है। 29 नवंबर को प्रस्तावित किसानों के संसद कूच समेत आंदोलन पर आगे की रणनीति बनाने के लिए सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक शुरू हो चुकी है। एक साल पूरा होने पर शुक्रवार को जहां सीमाओं पर कार्यक्रम आयोजित किए गए तो एमसपी की गारंटी, प्रदूषण संबंधी कानूनों के तहत किसानों पर जुर्माना न करने और बिजली संशोधन अधिनियम को खारिज करने सहित तमाम मांगों पर किसानों का संघर्ष जारी है। 

विज्ञापन


एमएसपी समेत कई मांग कर रहे किसान
संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित दूसरी मांगों पर सुनवाई की मांग की है। अब किसानों को सरकार की तरफ से दोबारा वार्ता के लिए बुलाए जाने का इंतजार है ताकि आंदोलन की दिशा और दशा तय की जा सके। अभी तक किसानों को सरकार की ओर से वार्ता के लिए कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। पहले से किसानों ने 29 को संसद कूच के तहत शीतकालीन सत्र के दौरान रोजाना 500 ट्रैक्टर के साथ दिल्ली में प्रवेश करने की घोषणा की थी। 

मगर, किसान नेताओं का कहना है कि उनकी तरफ से यह एलान पहले किया गया था। शनिवार सुबह 11 बजे से होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में एमएसपी, पराली के लिए कानून, बिजली संशोधन अधिनियम, किसानों को मुआवजा, मृत किसानों की याद में स्मारक बनाने और सभी राज्यों में आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग पूरी नहीं हुई है। इस बैठक में एमएसपी की गारंटी के लिए प्रारूप तय किए जाने की भी उम्मीद है ताकि सरकार की तरफ से इस दिशा में पहल होने के बाद किसान तत्काल इसे पेश कर सकें। 
विज्ञापन






शेष मांगों पर सरकार से वार्ता का किसानों को इंतजार 
संयुक्त किसान मोर्चा के शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों के साथ ही किसान एमएसपी की गारंटी की मांग करते रहे हैं। पिछले साल सरकार ने जिन मांगों पर हामी भर दी थी, अब तक उन्हें लागू नहीं किया गया है। पिछले करीब एक साल, चार महीने के दौरान आंदोलन में 700 से अधिक किसानों की जानें गईं। आश्रितों को मुआवजा देने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने सहित किसानों की और भी मांगे हैं। वार्ता की शुरुआत होने पर सभी पहलुओं पर बातचीत हो सकती है। मगर, किसानों की प्रमुख मांगों पर सुनवाई होने के बाद ही किसानों का आंदोलन के लिए आगे की रणनीति तय करेंगे।

सभी मांगे नहीं हुई पूरी, संसद कूच पर फैसला आज: डॉ. दर्शनपाल
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि आंदोलन का एक साल पूरे होने की किसानों में खुशी है। पूरी दुनिया और देश में किसानों के आंदोलन के समर्थन में है। सरकार ने तीनों कानून वापस लेने की तो घोषणा कर दी है मगर मोर्चा के मांग पत्र में छह मांगे हैं। सभी मांगों पर सुनवाई के बाद ही किसान आंदोलन की दिशा तय होगी। आंदोलन का एक साल पूरा होने पर हजारों की संख्या में देश के अलग अलग हिस्सों से किसान फिर इकट्ठा हो रहे हैं। 29 को किसानों के संसद कूच पर शनिवार को होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कूच की घोषणा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने से पहले की गई थी। 

एमएसपी गारंटी का भी बैठक में तय होगा खाका
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि 29 नवंबर को प्रस्तावित संसद कूच पहले से प्रस्तावित है। शनिवार को होने वाली बैठक में आंदोलन की रुपरुखा तय होगी। इस दौरान एमएसपी की गारंटी सहित दूसरे पहलुओं पर भी बातचीत होगी। किसानों की मांगे पूरी होने के बाद ही आंदोलन पर कोई फैसला लिया जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें