सरकार के प्रस्ताव को लेकर किसान नेताओं की आपस में चल रही बैठक समाप्त हो गई है। किसान नेताओं ने तय किया कि वे गुरुवार को अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे।
आज की बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि आज प्रकाश पर्व का शुभ दिन है। हमें इस मुद्दे पर मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आखिर कबतक किसान इस आंदोलन के कारण सड़कों पर बैठे रहेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा।
सरकार के दोनों प्रस्तावों को अस्वीकार करने के बाद फिलहाल किसान आपस में बैठक करके आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक जारी है।
केंद्र सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। इस बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकला है। केंद्र सरकार ने एक साल तक कृषि कानून को निलंबित रखने का प्रस्ताव दिया था, पर किसानों को यह मंजूर नहीं था।
संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड को लेकर यह सुनिश्चित किया है कि यह अनुशासित परेड होगी। इसमें किसी उपद्रवी को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल किसान इसे लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं कि क्या उन्हें रिंग रोड तक जाने दिया जाएगा या बॉर्डर पर ही परेड करनी होगी।
भोजनावकाश के बाद किसान नेताओं और सरकार की बैठक फिर शुरू हो गई है। इस दौरान किसानों ने कहा कि एनआईए प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है। तब सरकार ने उनसे बेगुनाह लोगों की लिस्ट देने को कहा है।
26 जनवरी को अगर किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तो उससे किसान कैसे अपना बचाव करके आगे बढ़ेंगे इसकी ट्रेनिंग किसान ले रहे हैं। चिल्ला बॉर्डर पर प्रदर्शनरत किसानों ने आज अभ्यास किया कि अगर 26 जनवरी को पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तो किसान कैसे जमीन पर रेंगते हुए जाएंगे।
किसान नेताओं और सरकार के बीच बैठक जारी है। किसान नेताओं ने बैठक में जाने से पहले कहा था कि वो सरकार से किसानों को मिले एनआईए के नोटिस पर चर्चा करेगी।
टिकरी बॉर्डर पर बुधवार को एक और किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई है।
दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किसानों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू हो चुकी है। बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सोमप्रकाश मौजूद हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल किसानों के साथ बैठक करने के लिए विज्ञान भवन पहुंचे। आज किसानों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता होनी है।
दिल्ली से सिंघु बॉर्डर जाने वाले जीटी करनाल रोड पर भारी जाम लगा है।
दसवें दौर की वार्ता के लिए किसान नेता सिंघु बॉर्डर से विज्ञान भवन पहुंच चुके हैं।
जब सीजेआई ने कहा कि कमेटी को निर्णय लेने के अधिकार नहीं दिए गए हैं तो वकील हरीश साल्वे ने कहा कि, अदालत हमेशा से ही कमेटी का सहारा लेती रही है। अगर अगली बार कुछ ऐसा हुआ या कोर्ट पर कोई आक्षेप लगा तो हम अवमानना नोटिस लाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के सदस्यों के बारे में जिस तरह से बात की गई और उनकी छवि को खराब किया गया उस पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ किया कि कमेटी सिर्फ सलाह देने के लिए बनाई गई है उसके पास कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सुनवाई करते हुए कहा कि हमने समिति को किसानों को सुनने और हमारे पास आकर रिपोर्ट फाइल करने की शक्ति दी है। इसमें पक्षपात की क्या बात है? सीजेआई ने कहा कि कोर्ट पर कलंक मत लगाइए।
किसान महापंचायत की ओर से पेश हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के एक सदस्य के इससे अलग होने पर उन्होंने कमेटी को दोबारा बनाने के लिए आवेदन दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या यह वही संस्था है जिसने कल कमेटी के गठन को खारिज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा है जो उसने 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दायर किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैक्टर रैली के खिलाफ डाली गई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि वह इस पर कोई आदेश पारित नहीं करेगा। सिर्फ यही नहीं अदालत ने कहा कि किसानों द्वारा 26 जनवरी को किए जाने वाले किसी भी और तरह के प्रदर्शन पर वह आदेश पारित नहीं करेगी। सीजेआई ने कहा कि यह पुलिस को निर्णय लेना है। हम कोई आदेश नहीं देंगे। आप एक्शन लेने के लिए उचित अथॉरिटी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में किसानोें की ट्रैक्टर रैली के खिलाफ डाली गई याचिका और किसानों के आंदोलन को लेकर डाली गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार के साथ होने वाली दसवें दौर की वार्ता के लिए रवाना होने से पहले ट्वीट किया- हम होंगे कामयाब, इसी उम्मीद के साथ विज्ञान भवन रवाना।
किसानों और सरकार के बीच आज होने वाली वार्ता पर एक किसान नेता ने सिंघु बॉर्डर पर कहा कि, आज की बैठक भी पहले जैसे ही होगी। बैठक से हमें कोई उम्मीद नहीं। जब भी बैठक होती है हम इसलिए जाते हैं कि सरकार हमारे साथ बैठक कर इसका हल निकाले। लेकिन हल निकालने का सरकार का अभी भी मन नहीं बना है।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को एमएसपी पर कानून बनाना है और कृषि कानूनों को खत्म करना है। हमारी लड़ाई सरकार और कॉर्पोरेट सिस्टम से है।
किसानों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पुलिस के साथ होने वाली बैठक के लिए विज्ञान भवन पहुंचा है। बैठक के लिए अंदर जाने से पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि, 'हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। हम उनसे कहेंगे कि ट्रैक्टर रैली के लिए रिंग रोड ठीक रहेगा क्योंकि ट्रैक्टर बहुत ज्यादा होंगे।'
कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली दिल्ली में निकालेंगे या नहीं इसे लेकर किसान नेताओं का एक दल दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से वार्ता के लिए विज्ञान भवन पहुंचा है।
किसान यूनियन के नेता कलवंत सिंह संधु ने कहा है कि आज किसानों का एक दल दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलकर 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को लेकर बैठक करेगा।
गुरु पर्व के दिन यूपी गेट पर किसान आंदोलन के बीच नगर कीर्तन निकाला गया। सिख समाज के किसानों ने नगर कीर्तन में धार्मिक सद्भावना के साथ प्रार्थना की। नगर कीर्तन में शामिल पंच प्यारे यूपी गेट अंडरपास से होकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बने मंच के पास तक पहुंचे।
टिकरी बॉर्डर पर मंगलवार को जहरीला पदार्थ खाने वाले किसान की देर रात संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसने कल मुख्य मंच के पास जहर खाया था। वह रोहतक का रहने वाला था।
सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गुरु गोविंद सिंह के 'प्रकाश पर्व' पर अरदास की। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, गुरु गोविंद सिंह हमारे 10वें गुरु हैं। उन्होंने सिख पंथ की नींव रखी थी। उनकी कुर्बानी बहुत बड़ी है। आज हमारी खुशी का ठिकाना नहीं है।
समिति के सदस्य अनिल घनवट ने कहा, इन कानूनों पर निष्पक्ष चर्चा होगी। समिति के सदस्य रिपोर्ट तैयार करने के दौरान कृषि कानूनों पर अपनी निजी राय को अलग रखेंगे। महाराष्ट्र के शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट ने कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि हमें कानूनों के समर्थन और विरोध कर रहे सभी किसान संगठनों को सुनना है और रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को भेजनी है। हम सरकार या किसी के भी पक्ष में नहीं हैं।
दरअसल, मंगलवार को होने वाली इस बैठक को सरकार ने ट्रैक्टर रैली और सुप्रीम कोर्ट की गठित समिति पर किसान संगठनों का रुख भांपने के लिए एक दिन के लिए टाल दी थी। आज ही ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी है। वहीं, दसवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगी। सरकार की ओर से एक बार फिर से किसान संगठनों को कानून के प्रावधानों पर आपत्तियां देने के लिए कहा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को सुबह 11 बजे से शुरू हुई तकरीबन एक घंटे की बैठक में किसान नेताओं से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा, मगर किसान नहीं माने। माना जा रहा है कि अगली बैठक एक या दो दिन में फिर होगी। वहीं, तीनों कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति की मंगलवार को पहली बैठक पूसा परिसर में हुई, जिसमें यह तय किया गया है कि समिति किसानों के साथ 21 जनवरी को पहली बैठक करेगी, जो सुबह 11 बजे शुरू होगी। जो किसान बैठक में नहीं आ सकते हैं उनकी राय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ली जाएगी।
दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 55 दिनों से जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार आज किसान संगठनों के साथ दसवें दौर की बातचीत करेगी। सरकार इस बैठक में किसानों से गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली न करने का अनुरोध करने के साथ ही फिर से कानूनों के प्रावधान पर चर्चा का प्रस्ताव देगी। वहीं, ट्रैक्टर रैली निकालने पर अडे़ किसान नेताओं को दिल्ली, यूपी और हरियाणा की पुलिस मना नहीं पाई।