शरीर में अकड़न, सोचने, समझने, महसूस करने की क्षमता घटने, तनाव से दिमाग पर होने वाले प्रभाव से शरीर में किस तरह का नुकसान हो सकता है और उसे दूर कैसे किया जा सकता है। एम्स इस विधि को 11 देशों से आए विशेषज्ञों को सिखा रहा है। दरअसल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, (एम्स), दिल्ली के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों के लिए टिप्स 2022 का आयोजन किया है।
पार्किंसन घटा देता है दिमाग के सिग्नल की गति
एम्स के वरिष्ठ डॉ. कंवल प्रीत कोचर ने डॉ. लक्ष्मण पाटिल के साथ मिलकर पार्किंसन से दिमाग पर होने वाले असर पर एक अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि सामान्य व्यक्ति में शरीर के अंगों से दिमाग तक सूचना का आदान-प्रदान एक हजार से 1500 मिली सेकंड की गति से होता है, जबकि पार्किंसन के मरीजों में यह गति काफी घट जाती है। इससे शरीर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं कर पाता। बता दें कि पार्किंसन के मरीजों का शरीर अकड़ जाता है। इसके अलावा मरीज संतुलन तक खो देता है।