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50 फीसदी क्षमता के साथ खुल रहे ईडीएमसी के स्कूल

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नई दिल्ली। राजधानी में कोरोना के मामले कम होने के बीच तमाम गतिविधियां आरंभ हो जाने पर पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) ने अपने स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। वह 50 प्रतिशत बच्चों की क्षमता के साथ आठ नवंबर से स्कूल खोलेगा। हालांकि, अभिभावकों की सहमति के बाद ही बच्चे को स्कूल आने की इजाजत होगी।
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महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि ईडीएमसी के सभी प्राथमिक विद्यालय, प्रतिभा विद्यालय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त स्कूल आठ नवंबर से खुलेंगे। अभी 50 प्रतिशत बच्चों को ही एक समय में बुलाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके पीछे कोरोना की रोकथाम का पालन कराना सुनिश्चित करने की मंशा है।
उन्होंने अभिभावकों से निवेदन किया है कि यदि बच्चा अस्वस्थ हो, सर्दी, खांसी, जुखाम या बुखार हो तो उसे स्कूल ना भेजें। इस संबंध में बच्चे के टीचर को अवश्य बताएं।
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महापौर ने कहा कि स्कूल खुलने के बाद भी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड पर भी जारी रखा जाएगा, क्योंकि जो बच्चे स्कूल आने में असमर्थ हैं उनकी शिक्षा किसी भी कारण से बाधित न हो।
टीकाकरण केंद्रों से टीचरों को हटाया
शिक्षा समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि जो अध्यापक टीकाकरण केन्द्रों पर कार्यरत थे उन्हें हटा दिया गया है। साथ ही स्कूलों में चल रहें टीकाकरण केन्द्रों को ऐसे स्थान पर सीमित कर दिया गया है जहां बच्चों की आवाजाही ना हो।
उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष के बाद स्कूल खुल रहे हैं, ऐसे में सभी स्कूलों में सफाई की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूल परिसर में कक्षाओं के बाहर हैंड सैनिटाइजर रखा जाएगा और शौचालयों में पर्याप्त साबुन की व्यवस्था की जाएगी। इन दिनों डेंगू के मामलों में भी इजाफा होने के मद्देनजर स्कूलों में फोगिंग और पानी की टंकियों की सफाई करवाई जा रही है।
स्कूलों में ब्रीडिंग स्पॉट की जांच करवाई जा रही है। वहीं स्कूल निरीक्षक अपने आवंटित स्कूलों का दौरा करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि उपरोक्त दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन हो।
दक्षिण और उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अभी नहीं लिया है निर्णय
दक्षिण दिल्ली नगर निगम और उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अभी अपने स्कूल खोलने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। दोनों नगर निगमों का कहना है कि वह अभिभावकों से राय लेने के बाद ही स्कूल खोलने के संबंध अंतिम निर्णय लेंगे, क्योंकि जब तक अभिभावक बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए तैयार नहीं होंगे तब तक उनके निर्णय का कोई औचित्य नहीं है।
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