दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवारों और छात्रों के विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हथियार लहराने, लग्जरी कारों के काफिले निकालने और अन्य नियमों के उल्लंघन पर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने 140 छात्र उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन उम्मीदवारों का आचरण लिंगदोह समिति की सिफारिशों, आदर्श आचार संहिता और अदालत के पूर्व आदेशों के अनुरूप नहीं था।
49 वाहन जब्त, 5400 से अधिक चालान
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने बताया कि डूसू चुनाव से जुड़े उल्लंघनों के मामले में 49 वाहन जब्त किए गए, जबकि 5400 से अधिक चालान काटे गए और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन आंकड़ों पर अदालत ने कहा कि चुनाव के दौरान नियमों के लगातार और बार-बार उल्लंघन में कोई संदेह नहीं है। खंडपीठ ने छात्र संगठनों से भी जवाब मांगा कि उल्लंघनों के लिए उन पर नजीर के तौर पर चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि नियम तोड़ने वाले व्यक्तिगत छात्रों के साथ-साथ संबंधित छात्र संगठनों पर भी सामूहिक रूप से चुनावी हर्जाना लगाया जा सकता है।
कैंपस और हॉस्टल में भी जुलूस नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी तरह का विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा। यह रोक सड़कों के अलावा कॉलेज परिसरों और हॉस्टलों में भी लागू होगा। आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी गई है। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित उम्मीदवारों, छात्रों और समर्थकों के खिलाफ आपराधिक व प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर सवाल
अदालत ने प्रचार के दौरान बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के काफिलों को लेकर दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि इन्हें सड़कों और नॉर्थ कैंपस के आसपास पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काफिलों से आम लोगों में भय और वर्चस्व की भावना पैदा होती है। कारों की छत और बोनट पर खड़े होकर प्रचार करने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली नगर निगम को नियमों के उल्लंघन पर सतर्कता बरतने और सक्रिय कार्रवाई करने का निर्देश दिया।