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डीटीयू : 2021 सत्र से मास्टर ऑफ डिजाइन की भी पढ़ाई, एयू में छुट्टियां 31 मई तक

Thu, 13 May 2021 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 15 मई से ऑनलाइन आवेदन
  • आवेदन पत्र भरने की आखिरी तारीख 14 जून तक
  • प्रवेश परीक्षा के मेरिट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर दाखिला
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DTU Delhi
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विस्तार
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू ) शैक्षणिक सत्र 2021-22 से मास्टर ऑफ डिजाइन प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। इस प्रोग्राम में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन विंडो 15 मई से ओपन होगी और 14 जून तक खुली रहेगी। इसमें बीटेक, बीई, बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, बैचलर ऑफ डिजाइन, बैचलर ऑफ फाइन आर्ट और इससे समानांतर डिग्री प्रोग्राम के विद्यार्थी दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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चार वर्षीय डिग्री पास आउट प्रोग्राम में छात्र के 55 फीसदी अंक होने अनिवार्य हैं। जबकि आरक्षित वर्ग के लिए  50 फीसदी होने चाहिए। हालांकि, सीट कॉमन एंट्रेस एग्जामिनेशन फॉर डिजाइन 2021 (सीईईडी) के मेरिट स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर ही मिलेगी। इसमें 85 फीसदी सीटें दिल्ली और 15 फीसदी सीटों पर अन्य राज्यों के लिए आरक्षण का नियम लागू होगा। 

कुलपति प्रो. योगेश सिंह के मुताबिक, विश्वविद्यालय का डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन इन मास्टर डिग्री प्रोग्राम को शुरू कर रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आज डिजाइन पास आउट छात्रों की मांग बढ़ गई है। इसी के चलते पहले बैचलर ऑफ डिजाइन प्रोग्राम शुरू किया गया था। इसके बाद अब मॉस्टर ऑफ डिजाइन की पढ़ाई भी करवाई जाएगी। दरअसल तकनीक से लेकर हर जगह डिजाइनिंग की मांग बढ़ी है। इस कोर्स को करने के बाद मार्केट में डिजाइन पर आधारित नौकरी की राह आसान होगी। ऑनलाइन दाखिले आवेदन पत्र के लिए सामान्य वर्ग को एक हजार रुपये और आरक्षित वर्ग के छात्रों को पांच सौ रुपये फीस जमा करनी पड़ेगी।
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पहली सूची 30 जून को 
दाखिले के लिए शार्ट लिस्टेड छात्रों की पहली सूची 30 जून को जारी होगी। इसमें वेटिंग लिस्ट भी शामिल होगी। यदि कोई सीट खाली रहती है तो दूसरी और तीसरी सूची भी जारी की जाएंगी। 

साढ़े चार लाख तक आय वाले परिवारों को राहत:
विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों के छात्रों को फीस में छूट देता है। जिन परिवारों की आय सालाना साढ़े चार लाख रुपये से कम होती है, ऐसे परिवारों के छात्रों को फीस में छूट दी जाती है। हालांकि, छात्र को इस सुविधा का लाभ लेने से पहले अपने दस्तावेज जमा करवाने होते हैं। 

दो साल की फीस 4.25 लाख  
मास्टर ऑफ डिजाइन के दो वर्षीय प्रोग्राम में छात्रों को 4 लाख 25 हजार रुपये फीस देनी होगी। इसमें पहले वर्ष 2 लाख 6 हजार और दूसरे वर्ष 2 लाख 19 हजार रुपये की फीस जमा करनी पड़ेगी। यदि कोई छात्र दाखिला लेने के बाद फीस जमा नहीं कर पाता है तो सीट अन्य को दे दी जाएगी। दाखिला सीट छोड़ने पर फीस विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देश के तहत लौटाई जाएगी।

मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी देना होगा:
 दाखिले के दौरान छात्र को अपना 10 वीं, 12वीं की डिग्री के अलावा जन्मतिथि का सर्टिफिकेट, सीईईडी स्कोर कार्ड के अलावा आरक्षित वर्ग का सर्टिफिकेट भी देना होगा। इसके अलावा दाखिले के दौरान छात्र को मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी देना पड़ेगा। 

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अंबेडकर विश्वविद्यालय में 31 मई तक गर्मियों की छुट्टियां

आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली ने कोरोना की दूसरी लहर के चलते गर्मियों की छुटिट्यों में बदलाव कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगस्त की बजाय 31 तक गर्मी की छुटिट्यां घोषित कर दी हैं। इसके अलावा गर्मियों की छुटिट्यों में बदलाव के चलते ही ईवन सेमेस्टर अब एक जून से शुरू होकर 15 सितंबर तक चलेगा।

अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। इसके मुताबिक, एक मई से 31 मई तक गर्मियों की छुटिट्यां रहेंगी। इसके बाद एक जून से जब विश्वविद्यालय दोबारा खुलेगा तो उसी दिन से ईवन सेमेस्टर के तहत पढ़ाई शुरू हो जाएगी। गर्मियों की छुटिट्यों में फेरबदल के चलते शैक्षणिक सत्र 2020-21 के टाइम-लाइन में बदलाव हुआ है।

दरअसल पिछले साल कोरोना की पहली लहर में शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण 2019 सत्र देरी से पूरा हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सितंबर 2020 में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए देशभर के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए पूरा साल का अकेडमिक केलेंडर बनाकर दिया था। इसके तहत 30 जुलाई तक ईवन सेमेस्टर समाप्त होना था। 

इसके बाद एक हफ्ते का समनर ब्रेक और उसके बाद मध्य अगस्त में वार्षिक परीक्षाएं आयोजित होनी थी। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर ने सारे दिशा-निर्देशों को फेल कर दिया है। इससे पहले दिसंबर और जनवरी में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को स्थानीय हालात के आधार पर अकेडमिक केलेंडर में फेरबदल की अनुमति भी दी थी, ताकि वे अपना सत्र सुचारू रूप से चला सकें। इसी के तहत अंबेडकर विश्वविद्यालय ने यह फेरबदल किया है। इस फेरबदल के तहत विश्वविद्यालय जल्द ही अन्य दिशा-निर्देश भी जारी करेगा। 
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