जिस दिन भारत जागेगा, उसी दिन विश्व जागेगा। यह समय भारतीय अस्मिता, अध्यात्म और भारत की संभावनाओं के जागरण का है। यह बात जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भारत मंडपम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के 'राष्ट्र निर्माण संकल्प' कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भारत तभी महान होगा जब हम भारतीय एक होंगे। आज जातियों और क्षेत्रों में बंटने से ही देश कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि साथ लड़ेंगे, तभी साथ बढ़ेंगे। राष्ट्र निर्माण आत्मीयता से ही संभव है।
डॉ. पण्ड्या ने आत्मविस्मृति को देश की पहली समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास से मुंह मोड़कर भविष्य का निर्माण नहीं किया जा सकता और बिना निदान के उपचार संभव नहीं है। भारत ने शक्ति को भुला दिया, इसलिए शक्ति ने भारत को भुला दिया।
उन्होंने कहा कि माताजी की जन्मशताब्दी, अखंड दीप की शताब्दी और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना-शताब्दी का संगम समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दे रहा है। यह त्रिवेणी साधना को सेवा, संस्कार को व्यवहार और आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने की प्रेरणा देती है। देवत्व के तीन गुण गिनाते हुए उन्होंने कहा कि देने की आकांक्षा रखें, दूसरों की परेशानी दूर करें और जहां बैठ जाएं उसी स्थान को स्वर्ग बना दें।
31 अक्टूबर से दिल्ली में तीन दिवसीय महोत्सव
माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी पर 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में तीन दिवसीय विराट महोत्सव होगा, जिसमें देश-विदेश के हजारों गायत्री साधक जुटेंगे। इसी की तैयारियों के क्रम में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का यह आयोजन हुआ, जो शांतिकुंज, हरिद्वार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि यह कालखंड महाकाल के प्रत्यावर्तन चक्र का है, जब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अपनी प्रतिभा, सामर्थ्य और संगठन शक्ति से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जब-जब व्यक्तिवाद हावी हुआ है, राष्ट्र का विघटन हुआ है, इसलिए संयम से जीवन जीने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि राष्ट्र की असली ताकत उसके नागरिक हैं और नागरिक निर्माण के बिना राष्ट्र निर्माण बेमानी है। जब तक भीतर शांति नहीं होगी, तब तक बाहर शांति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति का उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए हो, जिसकी शुरुआत गांव की सफाई जैसी छोटी-छोटी चीजों से होती है। संस्कार दिए नहीं जाते, जीए जाते हैं।
डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने कहा कि राष्ट्र निर्माण सिर्फ सड़कों, पुलों और भवनों से नहीं, बल्कि चेतना के निर्माण से होता है। नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता, राष्ट्रप्रेम और विकास में सक्रिय भागीदारी ही सशक्त भारत की आधारशिला है। उन्होंने आगाह किया कि नैतिक मूल्यों के अभाव में विकास पतन की ओर ले जाता है।