दिल्ली नगर निगम का 2012 में विभाजन कर पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी निगम का गठन किया गया। इसके बाद बीते 10 साल में दक्षिणी निगम की आर्थिक स्थिति कुछ हद तक सुधरी, लेकिन पूर्वी और उत्तरी निगम की आर्थिक स्थिति निरंतर खराब रही] लेकिन अपनी खराब स्थिति के बावजूद तीनों निगमों ने सफाई के अलावा कई विकास परियोजनाओं पर सरकारी-निजी भागीदारी से काम कराया।
दिल्ली में कई मल्टीलेवल पार्किंग बनाई और कई का निर्माण चल रहा है। निगमों ने अपने भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए, इस परियोजना पर लगातार काम जारी है। निगमों ने अपने क्षेत्र में स्कूलों का निर्माण कराया और अपने व डीडीए के अधीन कई पार्कों को हरा-भरा किया। घर-घर कूड़ा उठाने के काम को सफलता पूर्वक किया। दक्षिणी निगम ने वेस्ट टू वंडर, भारत दर्शन जैसे बड़े पार्क बनाकर दिल्ली की जनता को समर्पित किया, जिनकी सराहना दुनियाभर में हो रही है।
विभाजन के बाद क्या हासिल किया
दिल्ली नगर निगम को तीन निगमों में विभाजित करने का प्रयोग अब तक सफल होता नजर नहीं आया है। 2012 से 2022 तक एमसीडी के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया। तीनों निगम पैसे की कमी से लगातार जूझते रहे। तीनों निगमों को अब तक अपने कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल है, लेकिन इसी दौरान पूर्वी निगम के पास अपने 354 विद्यालय हो गए, 5 अस्पताल और कई डिस्पेंसरियां, मोबाइल हेल्थ वैन बढ़ाई गईं, एक मल्टीलेवल पार्किंग बनी और एक निर्माणाधीन है।
दक्षिणी निगम ने स्कूलों की संख्या 582 तक पहुंचाई। इनमें 42 स्कूल पांच साल में बने, 20 मॉडल स्कूल भी बने। दो नए अस्पताल और प्रत्येक वार्ड में डिस्पेंसरी स्थापित की हैं। चार मल्टीलेवल पार्किंग शुरू कर दी हैं और उतनी ही निर्माणाधीन हैं। तीनों निगमों के विद्यालयों में लगातार छात्रों की संख्या बढ़ी है। इस साल दक्षिणी निगम के विद्यालयों में 93696, उत्तरी निगम के विद्यालयों में 84120, और पूर्वी निगम के विद्यालयों में 40000 से ज्यादा छात्रों ने दाखिला लिया है। भाजपा सत्ता में रही : साल 2012 में चुनाव हुए तो तीनों नगर निगमों में भाजपा को शानदार जीत मिली। भाजपा 272 में से 138 सीटों पर जीती थी, जबकि कांग्रेस को 77 सीटें ही मिलीं।
आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर पहुंची
2017 में दूसरी बार नगर निगम का चुनाव हुआ तो भाजपा ने एक बार फिर से जीत दर्ज की। इस बार भाजपा की सीटें बढ़कर 181 हो गईं। 2017 में पहली बार नगर निगम चुनाव लड़ते हुए आम आदमी पार्टी ने 49 सीटों पर जीत हासिल की और दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस को 31 सीटें मिलीं।
भ्रष्टाचार के लगते रहे आरोप
आम आदमी पार्टी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि दिल्ली के नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। भाजपा नगर निगम को नहीं चला पा रही है। आप का दावा रहा है कि वह निगम के पैसे से ही निगमों के शासन को बेहतर ढंग से चला सकती है।
दिल्ली सरकार के बजट में निगम की हिस्सेदारी
पांचवें दिल्ली वित्त आयोग के मुताबिक, दिल्ली सरकार के कुल बजट का 12.5 फीसदी हिस्सा नगर निगमों को मिलना चाहिए। यह राशि पूर्वी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट क्षेत्र की निगम इकाई को एक निश्चित अनुपात में मिलना चाहिए। निगमों को तीन किस्तों में दिल्ली सरकार से यह पैसा दिया जाना चाहिए। पहली किस्त अप्रैल, मई और जून महीने में। दूसरी किस्त जुलाई से दिसंबर तक और तीसरी किस्त जनवरी से मार्च के बीच मिलनी चाहिए। इसके अलावा निगम अपने स्तर पर आय बढ़ाने के लिए उपाय कर रहे हैं, लेकिन उनकी आय का सबसे बड़ा स्रोत राज्य सरकार द्वारा मिलने वाली आर्थिक सहायता है।
निगम कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा वेतन
बीते 10 साल में निगम ने अपने हजारों अनियमित कर्मचारियों को पक्का किया, लेकिन इन्हें समय पर वेतन नहीं दे पाए। निगम को संपत्तिकर और दूसरे करों से जो आय मिली, उसका अधिकतर पैसा कर्मचारियों के वेतन पर ही खर्च किया। तीनों नगर निगमों ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार उनका 13 हजार करोड़ से अधिक का बकाया पैसा नहीं दिया। यही वजह रही कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे।
तीनों निगमों का 13 हजार करोड़ रुपया बकाया
भाजपा नेताओं के मुताबिक, तीनों नगर निगमों का दिल्ली सरकार पर कुल 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। पूर्वी निगम के महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार अपने बजट में निगमों के लिए जो धन आवंटित करती है, वह बजट निगमों को नहीं दे रही। पूर्वी निगम का 2985 करोड़ रुपया बकाया है। इनमें से 450 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2021-22 का ही बकाया है।