उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बिजली की कीमतों को पेट्रोल-डीजल की तरह फलेक्सिबल बनाना जनता के लिए खतरनाक हो सकता है। केंद्र के इस फैसले के बाद पेट्रोल-डीजल की तरह बिजली बिल भी कभी काबू में नहीं आएंगे।
शुक्रवार को उदयपुर में उर्जा मंत्रियों की बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सरकारों का मुख्य लक्ष्य बिजली कंपनियों को फायदे में चलाना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के हर नागरिक को 24 घंटे, बेहद सस्ते दामों पर और गरीब लोगो को फ्री बिजली उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। आज बिजली सभी के लिए अहम जरूरत है। ऐसे में ऐसा विकल्प मिलना चाहिए कि लोगों को कैसे सस्ते दामों पर बिजली उपलब्ध हो सकें।
फ्री बिजली के संबंध में उन्होंने कहा कि जिन राज्यों की माली हालत ख़राब है वहां की सरकारों ने जनता को फ्री बिजली नहीं दी। इन सरकारों ने जनता के टैक्स के पैसों का सही से इस्तेमाल नहीं किया, इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति खराब हुई। जनता टैक्स इसलिए देती है कि सरकार उन्हें अच्छी शिक्षा-स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, सुरक्षा और रोजगार दे, ऐसे में यह सोच बेहद ग़लत है कि टैक्स के पैसे से सस्ती या सुविधाएं कैसे दो जा सकती है।
सुविधा के लिए टैक्स देती है जनता
सिसोदिया ने कहा कि इस अवधारणा पर चलते हुए ही प्राइवेट स्कूल बनाए गए कि कबतक टैक्स के पैसों से शिक्षा दी जाएगी। महंगे प्राइवेट अस्पताल बना दिए गए, यह कहते हुए कि कबतक टैक्स के पैसों से अच्छा इलाज दिया जाएगा। सड़कों पर महंगे टोल टैक्स लगा दिए गए यह कहते हुए कि कबतक टैक्स के पैसे से सड़कें बनाई जाएगी।