कोरोना महामारी की तरह डेंगू संक्रमण की लहर भी कम होने वाली है। करीब चार से पांच सप्ताह में यह बदलाव देखने को मिल सकता है क्योंकि अस्पतालों में अब नए डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी दर्ज होने लगी है। हालांकि वर्तमान स्थिति गंभीर बनी हुई है लेकिन डॉक्टरों को विश्वास है कि इस महीने के आखिर तक स्थिति में काफी बदलाव हो सकता है। फीवर वार्ड में बिस्तर भी खाली देखने को मिल सकते हैं।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल की डॉ. रजनी खेडवाल का कहना है कि अभी तक रोजाना 150 से अधिक डेंगू के मामले उनके यहां पहुंच रहे थे। जीटीबी अस्पताल के अलावा आसपास के अस्पतालों से भी मरीजों को रैफर किया जा रहा था लेकिन कुछ दिन से यह संख्या कम हो रही है। अगर पिछले एक दिन की बात करें तो करीब 20 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। इसके आधार पर यह उम्मीद की जा सकती है कि डेंगू संक्रमण की लहर अगले चार से पांच सप्ताह में कम हो सकती है।
दिल्ली नगर निगम के अनुसार राजधानी में पांच साल बाद डेंगू को लेकर इतनी गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है। अब तक 5277 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं जिनमें 2500 से ज्यादा मामले पिछले एक ही सप्ताह में मिल चुके हैं। डेंगू संक्रमण से नौ मरीजों की मौत हो चुकी है। 19 संदिग्ध मौतों को लेकर अब तक जांच चल रही है।
निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘5277 में से 1420 डेंगू मरीज सरकारी निगरानी सिस्टम से बाहर हैं। वहीं 1804 मरीजों की निगरानी में पता चला कि उन्हें संक्रमण बाहरी राज्य में हुआ था। इनके अलावा अस्पतालों ने अभी तक 444 डेंगू मरीजों की जानकारी निगम के साथ साझा नहीं की है।’
तापमान का दिखाई देने लगा असर
नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. बीपी कुमार का कहना है कि डेंगू को लेकर उनके यहां अभी भी हालात वैसे ही हैं लेकिन उन्हें भी उम्मीद है कि संक्रमण का ग्राफ लगभग उच्च स्तर तक पहुंच चुका है वह अगले कुछ दिन बाद इसमें कमी आने लगेगी। उन्होंने कहा कि तापमान कम होने पर मच्छर जनित बीमारियों का असर भी कम होने लगता है। चूंकि दिल्ली का तापमान अभी 10 डिग्री सेल्सियस तक आ चुका है। इसलिए डेंगू संक्रमण में कमी आ सकती है।
नए मरीज कम, गंभीर मामले चिंताजनक
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अमित ने बताया कि उनके यहां नए मरीजों की संख्या में कमी जरूर आई है लेकिन गंभीर मामले अभी भी काफी आ रहे हैं। इन मरीजों में लिवर और किडनी प्रभावित वाले रोगी भी हैं और आईसीयू की जरूरत वाले मरीज भी हैं। आरएमएल अस्पताल में फिलहाल एक भी आईसीयू बिस्तर खाली नहीं है। ठीक इसी तरह सफदरजंग और दिल्ली एम्स में भी सभी आईसीयू व वेंटिलेटर बिस्तर भरे हुए हैं।