याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला है। उसका जन्म 1941 में हुआ था और 1963 में राम प्रकाश सूद से विवाह हुआ था। उनके पति का 2009 में निधन हो गया था। उनके पास कोई फोटो पहचान पत्र नहीं है और बैंक में खाता खोलने के लिए अधिकारी उससे फोटो पहचान पत्र मांगते हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि 1999 में उसने बैंक खाते खोले थे और इक्विटी शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स में अपने पूर्व के नाम शशि सूद के नाम से निवेश किया था।
बिना केवाईसी दस्तावेजों के खुलवाए थे बैंक खाते
याचिका के अनुसार, महिला ने वे बैंक खाते और निवेश 2000 से पहले किए थे। उस समय मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड आदि जैसे केवाईसी दस्तावेजों की अनिवार्यता नहीं थी और इसलिए वे खाते और निवेश इन दस्तावेजों के बिना ही किए गए थे।
याचिकाकर्ता ने बताया कि साल 2012 में होशियारपुर के उपायुक्त ने उसे एक वसीयत जारी की थी। महिला ने यह प्रकाशित करने के लिए कि उसने अपना नाम शशि प्रभा सूद, शशि और शशि सूद से प्रभा सूद कर दिया है, दिल्ली के प्रकाशन विभाग के साथ पंजीकृत एक आवेदन दाखिल किया था।