सिग्नेचर ब्रिज पर लिफ्ट के संचालन में सुरक्षा कारणों का इसलिए हवाला दिया गया क्योंकि इसकी संरचना अलग है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पुल के धनुष के आकार के तोरण के तल पर चार लिफ्ट लगाई गई हैं। इनमें दो लिफ्ट 60 डिग्री के कोण पर जबकि शेष दो 80 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं। सुरक्षा के लिहाज से जरूरी तकनीकी पहलुओं को देखते हुए श्रम विभाग ने इसपर फिलहाल हरी झंडी देने से इंकार किया है। इससे पर्यटन विभाग को परियोजना में और देरी की चिंता सताने लगी है। अगर तकनीकी खामी को दूर करने में कोई अड़चन रह जाती है तो हो सकता है कि लिफ्ट का इंतजार कर रहे पर्यटकों को मायूसी का भी सामना करना पड़े।
अपनी तरह का पहला एसिमेट्रिकल केबल स्टे ब्रिज
सिग्नेचर ब्रिज देश का अपनी तरह का पहला एसिमेट्रिकल केबल स्टे ब्रिज है। इसे 2018 में आम जनता के लिए खोल दिया गया था। दिल्ली सरकार ने ने 31 जनवरी, 2019 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा था। पुल में कई वर्षों की देरी हुई, लेकिन 1,518 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्माण कार्य आखिरकार पूरा कर लिया गया।
दिल्ली सरकार के एक सूत्र के मुताबिक झुकी हुई लिफ्ट के कारण यह समस्या आ रही है, क्योंकि इसमें जगह कम है। इसके नीचे उतरने के लिए नियत जगह पर उचित इंतजाम नहीं है। झुकी हुई लिफ्ट का निर्माण रख-रखाव और निर्माण के दौरान सुविधा के मद्देनजर किया गया न कि पर्यटकों के लिए। यह 153 मीटर ऊंची संरचना है जो कुतुब मीनार के आकार से दोगुना है, इसलिए झुकी हुई लिफ्टों में लोगों को शीशे के सामने ले जाना जोखिम भरा हो सकता है।