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दिल्ली: सिग्नेचर ब्रिज से दिल्ली की खूबसूरती को निहारने के लिए इंतजार हो सकता है और लंबा, श्रम विभाग ने मंजूरी देने से किया इंकार

Tue, 12 Apr 2022 12:47 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सिग्नेचर ब्रिज पर लिफ्ट के संचालन में सुरक्षा कारणों का इसलिए हवाला दिया गया क्योंकि इसकी संरचना अलग है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पुल के धनुष के आकार के तोरण के तल पर चार लिफ्ट लगाई गई हैं। इनमें दो लिफ्ट 60 डिग्री के कोण पर जबकि शेष दो 80 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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दिल्ली की खूबसूरती को सिग्नेचर ब्रिज से निहारने का इंतजार कर रहे लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। पर्यटन विभाग को पुल के ऊपर लगे लिफ्ट के संचालन की मंजूरी देने से श्रम विभाग ने इंकार कर दिया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फिलहाल लिफ्ट के परिचालन की मंजूरी नहीं दी गई है।

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इससे लंबे समय से सिग्नेचर ब्रिज पर लिफ्ट से दिल्ली की खूबसूरती का दीदार करने का मौका मिलने में थोड़ी देरी होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले भी पर्यटन विभाग की ओर से कमियों को दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी साझा की गई है। इस संबंध में विभाग को अब श्रम विभाग की हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

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सिग्नेचर ब्रिज पर लिफ्ट के संचालन में सुरक्षा कारणों का इसलिए हवाला दिया गया क्योंकि इसकी संरचना अलग है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पुल के धनुष के आकार के तोरण के तल पर चार लिफ्ट लगाई गई हैं। इनमें दो लिफ्ट 60 डिग्री के कोण पर जबकि शेष दो 80 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं। सुरक्षा के लिहाज से जरूरी तकनीकी पहलुओं को देखते हुए श्रम विभाग ने इसपर फिलहाल हरी झंडी देने से इंकार किया है। इससे पर्यटन विभाग को परियोजना में और देरी की चिंता सताने लगी है। अगर तकनीकी खामी को दूर करने में कोई अड़चन रह जाती है तो हो सकता है कि लिफ्ट का इंतजार कर रहे पर्यटकों को मायूसी का भी सामना करना पड़े।

अपनी तरह का पहला एसिमेट्रिकल केबल स्टे ब्रिज

सिग्नेचर ब्रिज देश का अपनी तरह का पहला एसिमेट्रिकल केबल स्टे ब्रिज है। इसे 2018 में आम जनता के लिए खोल दिया गया था। दिल्ली सरकार ने ने 31 जनवरी, 2019 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा था। पुल में कई वर्षों की देरी हुई, लेकिन 1,518 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्माण कार्य आखिरकार पूरा कर लिया गया।

दिल्ली सरकार के एक सूत्र के मुताबिक झुकी हुई लिफ्ट के कारण यह समस्या आ रही है, क्योंकि इसमें जगह कम है। इसके नीचे उतरने के लिए नियत जगह पर उचित इंतजाम नहीं है। झुकी हुई लिफ्ट का निर्माण रख-रखाव और निर्माण के दौरान सुविधा के मद्देनजर किया गया न कि पर्यटकों के लिए। यह 153 मीटर ऊंची संरचना है जो कुतुब मीनार के आकार से दोगुना है, इसलिए झुकी हुई लिफ्टों में लोगों को शीशे के सामने ले जाना जोखिम भरा हो सकता है।
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