इस दौरान मध्य क्षेत्र में वन विभाग ने 2,866 पेड़ों को काटने और 701 के प्रत्यारोपण की इजाजत दी गई। इसी तरह वन विभाग के उत्तरी प्रभाग के तहत एजेंसियों को 689 पेड़ काटने और 269 पेड़ों को प्रत्यारोपण की अनुमति दी गई। दक्षिणी वन मंडल में 982 पेड़ों को काटने सहित 2000 के प्रतिरोपण की इजाजत भी दी गई।। दिल्ली सरकार ने 2019 से 2021 तक कुल 15,426 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जबकि इस दौरान 32,048 वृक्षों का प्रत्यारोपण किया गया।
वन विभाग ने 18 मई की स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि अधिनियम की धारा-9 के तहत केवल एक तिहाई (33.33 प्रतिशत) प्रतिरोपित पेड़ों से 16,461 पेड़ ही पिछले तीन वर्षों में बचाए जा सके। विभाग की ओर से 31 मई को दायर एक हलफनामे ने प्रतिपूरक पौधरोपण की एक दयनीय तस्वीर पेश की गई।
इसमें कहा गया है कि संबंधित एजेंसियों ने पिछले तीन वर्षों में काटे गए 4,09,046 पेड़ों के एवज में केवल 1,58,522 पौधे लगाए। डीपीटीए के प्रावधानों के अनुसार वन विभाग को प्रत्येक पेड़ के काटने पर 10 पौधे लगाना सुनिश्चित करना होगा। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन में अवैध रूप से पेड़ों को काटने, नुकसान पहुंचाने, छंटाई या जगह को कंक्रीट में बदलने के कई अपराध दर्ज किए गए हैं, लेकिन वर्षों से लंबित मामलों में न जुर्माना किया गया जबकि कई मामले लंबित भी हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नजमी वजीरी ने 20 मई को निर्देश दिया था कि दिल्ली में 2 जून तक पेड़ नहीं काटे जाएंगे। साथ ही कहा था कि बड़े पैमाने पर वृक्षों के अनाच्छादन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वायु प्रदूषण का हवाला भी दिया गया।