बिना आपूर्ति के बन रहे थे बिल
बयान के अनुसार कि फर्में माल की आपूर्ति के बिना और नकली चालान जारी कर बिल बनाने में संलिप्त थीं। वे लेन-देन का निपटान नकद में भी करते थे, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं था। पता चला है कि इनमें से कई कंपनियां सिर्फ एक व्यक्ति की हैं और संभावना है कि इन्हें टैक्स बचाने के लिए बनाया गया था।
चार कंपनियों ने एक ही आईपी एड्रेस से फाइल किया आईटीआर
अधिकारियों ने खुलासा किया कि इन 11 में से चार कंपनियों ने एक ही आईपी एड्रेस से टैक्स रिटर्न दाखिल किया था। साथ ही, छह कंपनियों के फोन नंबर एक थे और चार कंपनियां एक ही ईमेल-आईडी का उपयोग कर रही थीं।
अधिकारियों ने बयान में बताया कि शेष दो कंपनियों के पास भी एक ही बैंक अकाउंट नंबर था। विभाग द्वारा किए गए गोपनीय सत्यापन में 11 फर्मों में से कोई भी अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं मिली। इन फर्मों द्वारा प्राप्त आईटीसी के आधार पर कुल टैक्स चोरी 40 करोड़ रुपये के करीब होने की उम्मीद है। हालांकि पूछताछ बढ़ने के साथ-साथ इस आंकड़े के बढ़ने की भी संभावना है।