संतोष ने कहा कि इस क्षेत्र में खतरनाक धुएं की एक मोटी परत बन गई है, जिससे बच्चों को तकलीफ हो रही है। धुएं की वजह से क्षेत्र धूमिल हो रहा है, इसलिए दृश्यता भी कम हो गई है। इन सभी कारणों को देखते हुए स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि लैंडफिल साइट नजदीक होने के कारण यहां आसपास के इलाकों में दुर्गंध के साथ-साथ दृश्यता का स्तर भी कम रहता है। दिनभर धूल उड़ती है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
वहीं, बीते एक दिन से लगी आग के कारण स्थानीय लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि आग से निकलने वाले धुएं से दम घुट रहा है। सबसे अधिक परेशानी बच्चे व बुजुर्गों को हो रही है। मंगलवार को लैंडफिल साइट पर आग लग गई थी। दमकल विभाग को शाम करीब छह बजे आग लगने की सूचना मिली थी, जिसके बाद दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं थी। बाद में तीन और दमकल गाड़ियों को भेजा गया था।
सरकार का एक्शन, डीपीसीसी से मांगी रिपोर्ट
भलस्वा लैंडफिल साइट आग मामले में दिल्ली सरकार ने एक्शन लेते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से रिपोर्ट मांगी है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने डीपीसीसी को 24 घंटे में पूरी घटना की विस्तृत जांच करके रिपोर्ट विभाग को सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। डीपीसीसी की रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि लैंडफिल साइट में लगातार हो रहे आग के मामले भाजपा द्वारा संचालित एमसीडी के भ्रष्टाचार का नतीजा है। यदि समय- समय पर इसके निवारण के लिए नई उपलब्ध तकनीकों को अपनाया जाता तो आज दिल्ली वाले धुएं में जिंदगी व्यतीत नहीं कर रहे होते। उन्होंने कहा कि लैंडफिल साइट में आग लगने का सबसे बड़ा कारण उसमें से लगातार निकलने वाली मीथेन गैस है, जो न केवल आग की घटनाओं को बढ़ावा देती है बल्कि वायुमंडल के लिए भी हानिकारक है। राय ने कहा कि दिल्ली में इस समस्या से स्थायी रूप से नियंत्रण पाने के लिए मुंबई के डंपिंग स्थल पर लगे हुए गैस सकिंग सिस्टम को अपनाने के लिए डीपीसीसी और एमसीडी को निर्देश दिए गए हैं।